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प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
Agra: जब इश्क परवान चढ़ता है तो न जाति की दीवारें नजर आती हैं और न ही अपनों की नाराजगी। नागपुर के रहने वाले और मथुरा रिफाइनरी में अधिकारी एक युवक और आगरा की एक युवती की प्रेम कहानी भी कुछ ऐसी ही शुरू हुई थी।
रिफाइनरी में प्रशिक्षण के दौरान हुई यह मुलाकात धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गई। युवती के सवर्ण परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे, लेकिन प्रेमी जोड़े ने बगावत का रास्ता चुना। 20 अप्रैल 2007 को नोएडा के एक आर्य समाज मंदिर में ईश्वर को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे ले लिए। शुरुआत में दुनिया की परवाह किए बिना शुरू हुई यह गृहस्थी बेहद खुशहाल थी।
खुशियों का यह आशियाना ज्यादा लंबा नहीं टिक सका। साल 2010 में उनके घर एक बेटे का जन्म हुआ, जिसके बाद हालात तेजी से बदलने लगे। पति का आरोप था कि बेटे के जन्म के बाद पत्नी का रवैया पूरी तरह बदल गया और वह पारिवारिक आयोजनों से दूरी बनाने लगी। दूसरी ओर, महिला पक्ष से शादी में चार लाख रुपये नकद, कीमती गहने और घरेलू सामान देने के बावजूद विवाद गहराते चले गए। पति पर दहेज प्रताड़ना और मारपीट के गंभीर आरोप लगे, जिससे तंग आकर पत्नी साल 2012 में अपने बेटे को लेकर मायके लौट गई। यह अलगाव सिर्फ एक दूरी नहीं, बल्कि उस रिश्ते का अंत बन गया जिसकी नींव बगावत पर रखी गई थी।
मायके जाने के बाद दोनों के बीच दूरियां इतनी गहरी हो गईं कि कभी साथ लौटने की गुंजाइश ही नहीं बची। आखिरकार, 29 सितंबर 2025 को पति ने अपने वकील के जरिए अदालत में तलाक का मुकदमा दायर किया। कानूनी प्रक्रिया और तर्कों के दौर के बाद, 5 सितंबर 2026 को परिवार न्यायालय ने विवाह विच्छेद का फैसला सुना दिया। अदालत के इस आदेश के साथ ही उस प्रेम कहानी का हमेशा के लिए अंत हो गया, जिसने कभी अपनों से लड़कर सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाई थीं। बारह साल के लंबे अलगाव और अंतहीन कानूनी लड़ाइयों के बाद अब दोनों के रास्ते हमेशा के लिए जुदा हो चुके हैं।
Location : Agra
Published : 12 September 2026, 10:05 AM IST
Topics : Arya Samaj Wedding Court Verdict family dispute Love Marriage Divorce Mathura Refinery Officer