Gorakhpur News: खजनी तहसील में गायब हुई जमीन की फाइल? बुजुर्ग किसान दर-दर भटकने को मजबूर

गोरखपुर की खजनी तहसील में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। भभया गांव के बुजुर्ग किसान बहाउ यादव वर्षों से अपनी जमीन के सीमांकन के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं। अब उनकी फाइल गायब होने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। एसडीएम ने जांच कराने का आश्वासन दिया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 30 May 2026, 3:57 PM IST

Gorakhpur: गोरखपुर के खजनी तहसील से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बुजुर्ग किसान पिछले कई वर्षों से अपनी जमीन के सीमांकन (पत्थर नसब) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल पाया। हैरानी की बात यह है कि अब संबंधित फाइल के ही गायब होने की बात सामने आ रही है। उम्र के अंतिम पड़ाव में न्याय की उम्मीद लिए तहसील पहुंचने वाले बुजुर्ग की कहानी न सिर्फ व्यवस्था की सुस्ती को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सरकारी फाइलों के बीच आम आदमी की समस्याएं किस तरह दबकर रह जाती हैं।

वर्षों से तहसील के चक्कर काट रहे हैं बहाउ

मामला गोरखपुर जिले की खजनी तहसील के भभया गांव का है। गांव निवासी बुजुर्ग किसान बहाउ यादव अपनी जमीन के पत्थर नसब यानी सीमांकन के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। बहाउ यादव का कहना है कि वह कई बार तहसील प्रशासन को आवेदन दे चुके हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि हर बार उन्हें किसी न किसी बहाने से वापस भेज दिया जाता है। कभी नई तारीख दे दी जाती है तो कभी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने की बात कही जाती है।

गोरखपुर पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल! किन अफसरों की कुर्सी खिसकी और किसे मिली नई कमान?

35 किलोमीटर का सफर

पीड़ित किसान ने बताया कि उनका गांव तहसील मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। ऐसे में हर बार तहसील पहुंचना उनके लिए आसान नहीं है। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद वह न्याय की उम्मीद में लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि कई वर्षों से चल रही इस प्रक्रिया ने उन्हें मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से परेशान कर दिया है। खेत की जमीन का सीमांकन न होने से उन्हें अपनी संपत्ति को लेकर भी लगातार चिंता बनी हुई है।

धारा 24 की प्रक्रिया में अटका मामला

बहाउ यादव के अनुसार उन्होंने जमीन के सीमांकन के लिए धारा 24 के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कई बार आवेदन दिया था। लेकिन हर बार उनका मामला लंबित ही रहा। अब स्थिति यह है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से उन्हें बताया जा रहा है कि उनकी फाइल उपलब्ध नहीं है। यानी जिस फाइल के आधार पर पूरी प्रक्रिया आगे बढ़नी थी, वही फाइल अब रिकॉर्ड में नहीं मिल रही है।

फाइल गायब होने से उठे कई सवाल

मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि फाइल वास्तव में गायब है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है। सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और कर्मचारियों की होती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक आम नागरिक द्वारा जमा किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेज और फाइलें सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा।

गोरखपुर में पॉक्सो केस पर बड़ा फैसला! नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 22 साल की सजा

सरकारी दावों पर उठ रहे सवाल

प्रदेश सरकार की ओर से राजस्व और तहसील से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए लगातार निर्देश दिए जाते रहे हैं। आम लोगों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं और व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं।

एसडीएम ने कहा- मामला संज्ञान में नहीं था

इस मामले में जब प्रशासनिक पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो खजनी के एसडीएम Rajesh Pratap Singh ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया था। उन्होंने बताया कि फाइल गायब होने और धारा 24 से जुड़े पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। एसडीएम ने कहा कि वह रिकॉर्ड की जांच कराएंगे और यह पता लगाया जाएगा कि आखिर फाइल कहां है और मामले में क्या स्थिति है।

Location :  Gorakhpur

Published :  30 May 2026, 3:57 PM IST