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श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर (सोर्स- Pinterest)
Varanasi: वैश्विक आस्था के केंद्र श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के प्रबंधन को संभालने वाले 'श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास' का 44 वर्षों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इस दीर्घकालिक सफर में न्यास को एक लंबा समय बिना किसी स्थायी मुखिया के बिताना पड़ा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो न्यास अपने अस्तित्व के 44 सालों में से करीब 12 वर्ष तक स्थायी अध्यक्ष के बिना ही संचालित होता रहा। वर्तमान में भी स्थिति कुछ ऐसी ही बनी हुई है, जहां पिछले 18 महीने से न्यास के अध्यक्ष और पदेन सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ी फाइल शासन स्तर पर लंबित पड़ी है। अधिनियम के तहत गठित होने वाले इस महत्वपूर्ण न्यास को अपने इतिहास में अब तक केवल पांच स्थायी अध्यक्ष ही मिल सके हैं।
न्यास परिषद के पुनर्गठन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर औपचारिकताएं तो समय से पूरी कर ली गईं, लेकिन शासन की मुहर लगना अभी बाकी है। मंदिर प्रशासन ने दिसंबर 2024 में न्यास परिषद का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक एक महीने पहले ही संभावित अध्यक्ष और पांच नामित सदस्यों की सूची राज्य सरकार को भेज दी थी।
इस बात को बीते 18 महीने से अधिक का समय हो चुका है, परंतु उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अभी तक न तो नए अध्यक्ष की घोषणा की गई है और न ही पांच नामित सदस्यों के नामों को मंजूरी दी गई है। नतीजा यह है कि वर्तमान में न्यास परिषद का गठन अधर में है और पूरा कार्यभार केवल चार पदेन सदस्यों के भरोसे चल रहा है, जिनमें तीन प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
"1983 में न्यास की स्थापना से लेकर वर्ष 2026 के बीच यह चौथी बार है, जब अध्यक्ष और नामित सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में इस कदर लंबा विलंब देखने को मिल रहा है।"
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वर्ष 1983 से लेकर अब तक श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की कमान संभालने वाले पांच स्थायी अध्यक्षों का कार्यकाल इस प्रकार रहा है-
काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह (1983 - 2002): न्यास के पहले अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 1983 से 2002 तक एक लंबा कार्यकाल संभाला। उनके निधन के बाद न्यास में लंबे ठहराव की शुरुआत हुई।
टीपी तिवारी (2002): डॉ विभूति नारायण सिंह के बाद मध्य प्रदेश के सेवानिवृत्त अधिकारी टीपी तिवारी को अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन उन्होंने कुछ ही महीनों के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2009 तक (लगभग 6 साल) यह पद खाली रहा और मंडलायुक्त कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम देखते रहे।
पंडित हरिहर कृपालु त्रिपाठी (2009 - 2012): साल 2009 में प्रदेश सरकार ने उन्हें तीन वर्षों के लिए अध्यक्ष नामित किया। 2012 में उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद फिर करीब डेढ़ साल तक पद रिक्त रहा।
पं. अशोक द्विवेदी (2013 - 2019): वर्ष 2003 में न्यास के सदस्य रह चुके पं. अशोक द्विवेदी को 2013 में अध्यक्ष बनाया गया। बेहतर कार्यप्रणाली के कारण वर्ष 2016 में उन्हें दूसरी बार यह जिम्मेदारी सौंपी गई, जो 2019 तक चली।
प्रो. नागेंद्र पांडेय (2021 - 2024): पं. अशोक द्विवेदी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद दो साल का अंतर आया और फिर 2021 में प्रो. नागेंद्र पांडेय को अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिनका कार्यकाल दिसंबर 2024 में समाप्त हो चुका है।
न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो नागेंद्र पांडेय ने इस स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम-1983 के नियमों का अक्षरशः पालन करने के लिए न्यास परिषद का पूर्ण रूप से अस्तित्व में होना अत्यंत आवश्यक है। अध्यक्ष और सभी सदस्यों की उपस्थिति में ही बैठकों के भीतर किसी भी निर्णय पर आम सहमति बनती है, जो मंदिर के हित में होती है। उन्होंने भावुक होते हुए यह भी साझा किया कि जब से उनका अध्यक्ष पद का कार्यकाल समाप्त हुआ है, तब से वह मंदिर में दर्शन करने भी नहीं गए हैं।
इस पूरे मामले पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विश्वभूषण मिश्रा का कहना है कि मंदिर प्रशासन की ओर से अपनी जिम्मेदारी पूरी की जा चुकी है। न्यास का कार्यकाल समाप्त होने से एक माह पूर्व ही संभावित सदस्यों के नामों का प्रस्ताव शासन को प्रेषित कर दिया गया था। मंदिर के जितने भी नियमित और आवश्यक कार्य हैं, वे बिना रुके निरंतर सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। इस विषय को लेकर समय-समय पर शासन के साथ पत्राचार भी किया गया है और अब केवल शासन स्तर से आने वाले अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा की जा रही है।
Location : Varanasi
Published : 11 July 2026, 1:17 PM IST
Topics : Kashi Vishwanath Trust Temple Management Mystery UP Government Decision Varanasi News Vishwanath Temple History