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प्रतीकात्मक छवि (Img: AI)
Kanpur: आलू की खेती करने वाले किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। शिवराजपुर क्षेत्र में आलू के उचित दाम नहीं मिलने से किसान फसल को खेतों और सड़क किनारे फेंकने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि बाजार में आलू की कीमत इतनी कम है कि कोल्ड स्टोरेज से निकालकर बेचने पर लागत भी पूरी नहीं हो रही। ऐसे में किसान के सामने फसल बचाने के बजाय उसे फेंकने की मजबूरी खड़ी हो गई है।
शिवराजपुर इलाके में कई जगह खेतों और सड़क किनारे आलू के ढेर दिखाई दे रहे हैं। किसानों के मुताबिक, उन्होंने आलू की फसल तैयार करने में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य खर्च किए। इसके बाद फसल को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज का सहारा लिया गया।
अब जब आलू को बाजार में बेचने का समय आया तो भाव इतना कम मिल रहा है कि किसान की लागत निकलना मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज का किराया देने के बाद आलू को बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी जुड़ जाता है। ऐसे में बिक्री से मिलने वाली रकम खर्च के मुकाबले काफी कम पड़ रही है।
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कम कीमत के कारण कई किसानों ने आलू को खेतों में ही छोड़ दिया है। कुछ जगहों पर किसान आलू को सड़क किनारे भी फेंक रहे हैं। इससे बड़ी मात्रा में फसल बर्बाद हो रही है।
खेतों और सड़कों पर पड़े आलू किसानों की आर्थिक परेशानी की तस्वीर दिखा रहे हैं। जिन किसानों ने महीनों मेहनत करके फसल तैयार की, उनके लिए इसे बिना उचित कीमत के फेंकना बेहद मुश्किल स्थिति है।
सड़क किनारे और खेतों में फेंके गए आलू में से आसपास के गांवों की महिलाएं अच्छे आलू चुनकर अपने साथ ले जा रही हैं। कई जगह महिलाएं आलू के ढेर से खराब आलू अलग कर खाने लायक आलू बीनती नजर आ रही हैं।
एक तरफ किसान उचित दाम नहीं मिलने के कारण फसल को फेंक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवार इन्हीं आलू में से अच्छे आलू चुनकर इस्तेमाल के लिए ले जा रहे हैं। इससे फसल की बर्बादी और किसानों की परेशानी दोनों साफ दिखाई दे रही हैं।
किसानों का कहना है कि आलू को कभी अच्छी आमदनी देने वाली फसल माना जाता था। कई किसान इसे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर उगाते हैं। लेकिन इस बार कम भाव ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।
किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि बाजार में मिलने वाली कीमत से खेती की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही। ऐसे में अगले सीजन में आलू की खेती को लेकर भी किसानों में चिंता बढ़ सकती है।
किसानों के अनुसार, आलू की फसल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है। इसके लिए किराया देना पड़ता है। इसके बाद आलू को स्टोरेज से निकालकर मंडी या बाजार तक पहुंचाने में परिवहन का खर्च भी आता है।
जब बाजार भाव कम हो तो ये अतिरिक्त खर्च किसान के लिए बड़ा नुकसान बन जाता है। किसानों का कहना है कि यदि उन्हें लागत के आसपास भी कीमत मिल जाए तो फसल को फेंकने की नौबत नहीं आएगी।
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शिवराजपुर क्षेत्र के किसानों की मांग है कि आलू की कीमत में सुधार हो, ताकि उनकी मेहनत और लागत का उचित मूल्य मिल सके। किसानों का कहना है कि लगातार कम भाव रहने से खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।
खेतों और सड़क किनारे बर्बाद हो रहा आलू इस समय किसानों की आर्थिक परेशानी का बड़ा उदाहरण बना हुआ है। किसानों को उम्मीद है कि बाजार में भाव बढ़ेंगे और उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।
Location : Kanpur
Published : 5 September 2026, 4:15 PM IST