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स्वदेशी हथियारों का महा-मिशन (Img- AI)
New Delhi: वैश्विक स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व के तनाव और दक्षिण चीन सागर की रस्साकशी के बीच दुनिया भर के देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटे हैं। इस होड़ ने ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट को 138 अरब डॉलर के पार पहुंचा दिया है। इसी बीच स्वीडन के थिंक टैंक SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की एक हालिया रिपोर्ट ने हर किसी को हैरान कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक रक्षा निर्यात के मामले में पाकिस्तान (0.4% हिस्सेदारी, 21वां स्थान) भारत (0.2% हिस्सेदारी, 27वां स्थान) से आगे दिख रहा है। लेकिन इस आंकड़े के पीछे का सच बेहद दिलचस्प और आंखें खोलने वाला है।
रक्षा निर्यात में पाकिस्तान के आगे दिखने का सबसे बड़ा कारण कोई उसकी अपनी स्वदेशी तकनीक नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान खुद हथियार तैयार नहीं करता, बल्कि वह चीन के साथ मिलकर JF-17 थंडर फाइटर जेट असेंबल करता है और फिर इन्हें म्यांमार, नाइजीरिया तथा अजरबैजान जैसे देशों को बेच देता है।
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यह री-एक्सपोर्ट का आंकड़ा पाकिस्तान के खाते में जुड़ जाता है। कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश सस्ते चीनी हथियारों के चक्कर में पाकिस्तान से सौदे करते हैं, जिससे उसका एक्सपोर्ट वॉल्यूम बढ़ा दिखता है। इसके विपरीत, भारत का दशकों से प्राथमिक फोकस खुद को मजबूत करने पर रहा है।
भले ही वैश्विक हिस्सेदारी के आंकड़ों में भारत पीछे दिखता हो, लेकिन भारतीय रक्षा उद्योग ने इस साल 38,424 करोड़ रुपये ($4.6 बिलियन) का अपना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड एक्सपोर्ट दर्ज किया है। भारत का रक्षा निर्यात कागजी नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से बेहद उन्नत और स्वदेशी हथियारों पर आधारित है। वर्तमान में दुनिया के 80 से अधिक देश भारत से सैन्य उपकरण और आधुनिक हथियार खरीद रहे हैं।
फिलीपींस ने भारत के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लिए 375 मिलियन डॉलर का करार किया है, जबकि इंडोनेशिया के साथ 3,800 करोड़ रुपये की डील अंतिम चरण में है। आर्मेनिया भारत से पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। सबसे खास बात यह है कि अमेरिका और फ्रांस जैसे महाशक्ति देश भी भारत से लड़ाकू विमानों के पुर्जे, फ्यूजलेज, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक सॉफ्टवेयर कंपोनेंट्स खरीद रहे हैं।
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भारत का लक्ष्य केवल दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करना नहीं, बल्कि खुद को एक प्रमुख वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करना है। भारत सरकार ने वर्ष 2029 तक डिफेंस एक्सपोर्ट को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। जिस गति से भारतीय रक्षा उद्योग आकार ले रहा है, उससे साफ है कि आने वाले सालों में भारत आंकड़ों की इस बाजी में भी पाकिस्तान को काफी पीछे छोड़ देगा।
Location : New Delhi
Published : 5 September 2026, 3:43 PM IST
Topics : Geopolitics Indian Defence Made in India World News