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बांग्लादेशी अल्पसंख्यक (Img: X)
New Delhi: बांग्लादेश में हिंदू त्योहारों को लेकर विवाद बढ़ रहा है। जन्माष्टमी सहित कई प्रमुख हिंदू त्योहारों की सरकारी छुट्टियां रद्द होने से हिंदू समुदाय में नाराजगी है। चिंता जताई जा रही है कि इस फैसले का असर इस साल के जन्माष्टमी समारोहों पर पड़ सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश सरकार ने इस साल की शुरुआत में सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, दुर्गाष्टमी और बुद्ध पूर्णिमा जैसी छुट्टियों को आधिकारिक सरकारी छुट्टियों की सूची से हटा दिया था। इसके बाद हिंदू संगठनों और समुदाय के सदस्यों ने इस फैसले का विरोध किया।
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ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर के साथ-साथ चट्टोग्राम और सिलहट जैसी प्रमुख जगहों पर जन्माष्टमी के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, समुदाय के सदस्यों का कहना है कि पिछले वर्षों में देखी जाने वाली बड़ी शोभायात्राएं और भव्य समारोह इस साल नहीं होंगे। स्थानीय रिपोर्टों से पता चलता है कि बाजारों और मंदिरों में जन्माष्टमी से पहले का आम उत्साह और तैयारियां काफी कम हैं।
बांग्लादेश में राजनीतिक बदलावों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों के बीच, हिंदू समुदाय सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहा है। कई इलाकों में बड़ी धार्मिक शोभायात्राओं को लेकर सावधानी बरती जा रही है। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने घोषणा की है कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंदिरों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।
बांग्लादेश हिंदू जागरण मंच सहित कई संगठनों का कहना है कि सरकारी छुट्टियां रद्द होने से समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इन समूहों के प्रतिनिधियों का कहना है कि हालांकि कुछ जगहों पर शोभायात्राएं निकाली जाएंगी, लेकिन ज्यादातर जगहों पर पहले जैसी भव्यता देखने को नहीं मिलेगी।
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पहले, बांग्लादेश भर के मंदिरों और बाजारों में हिंदू त्योहारों के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां आम बात थी। जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के लिए शोभायात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए समुदाय के सदस्यों को चिंता है कि त्योहारों में पहले जैसी रौनक और उत्साह नहीं रहेगा।
Location : New Delhi
Published : 1 September 2026, 12:22 PM IST