कानपुर के चर्चित लैंबोर्गिनी हादसे में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। करीब 90 घंटे फरार रहने के बाद आरोपी शिवम मिश्रा को ग्वालटोली पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने जमानत अर्जी दाखिल करते हुए दावा किया कि हादसे के समय शिवम गाड़ी नहीं चला रहा था।

शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी
Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर-हाई-प्रोफाइल लैंबोर्गिनी हादसे में आखिरकार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी शिवम मिश्रा को आज गिरफ्तार कर ही लिया। ग्वालटोली थाने की पुलिस ने उसे छह बंगलिया रोड स्थित उसके घर के पास से हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद से वह करीब 90 घंटे तक फरार था, हालांकि पुलिस का कहना है कि वह कानपुर में ही मौजूद था और लगातार निगरानी में था।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर विधिक प्रक्रिया के तहत आरोपी को आज कोर्ट में पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और मामले की निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद शिवम मिश्रा को अदालत में पेश किया गया, जहां उसके वकील ने जमानत अर्जी दाखिल कर दी। बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि हादसे के समय शिवम कार नहीं चला रहा था। वकील का कहना है कि गाड़ी मोहन नामक व्यक्ति चला रहा था और शिवम उस समय अस्पताल में भर्ती था।
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वकील ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने जल्दबाजी में गलत गिरफ्तारी की है। उन्होंने कहा कि वे कोर्ट के सामने सभी साक्ष्य पेश करेंगे और साबित करेंगे कि शिवम को झूठा फंसाया गया है। अब अदालत में जमानत पर सुनवाई इस मामले की अगली अहम कड़ी होगी।
यह सनसनीखेज हादसा 8-9 फरवरी 2026 को कानपुर के वीआईपी रोड स्थित ग्वालटोली इलाके में हुआ था। लगभग 10 करोड़ रुपये कीमत की लैंबोर्गिनी कार तेज रफ्तार में कई वाहनों और राहगीरों को टक्कर मारते हुए आगे बढ़ती रही। इस हादसे में कम से कम छह लोग घायल हुए थे। कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा के नाम पर बताई जा रही है। शुरुआत में पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और कार को थाने में ढककर रख दिया गया, जिससे मामले को लेकर कई सवाल उठे।
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हालांकि, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई। फुटेज में कथित तौर पर शिवम मिश्रा को ड्राइविंग सीट पर देखा गया, जिसके बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई। यह मामला अब सिर्फ एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वीआईपी संस्कृति, कानून के समान लागू होने और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
अब सबकी नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां तय होगा कि आरोपी को राहत मिलती है या कानूनी शिकंजा और कसता है।