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माघ मेले में प्रवास कर रहे 150 साधु-संतों ने असुरक्षा जताते हुए पुलिस से सुरक्षा मांगी है। एलआईयू जांच के बाद अब तक 90 साधु-संतों को गनर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। मेला क्षेत्र में भारी पुलिस बल और सीसीटीवी से कड़ी निगरानी की जा रही है।
मेले में गनर के साथ घूम रहे ये साधु-संत
Prayagraj: माघ मेले में प्रवास कर रहे साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। मेले में रह रहे करीब 150 साधु-संतों ने खुद को असुरक्षित बताते हुए मेला पुलिस से व्यक्तिगत सुरक्षा की मांग की है। साधु-संतों द्वारा दिए गए आवेदनों के बाद मेला पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सभी आवेदनों की जांच गोपनीय तरीके से कराई जा रही है ताकि वास्तविक खतरे का आकलन किया जा सके।
मेला पुलिस के अनुसार साधु-संतों द्वारा बताए गए कारणों की जांच की जिम्मेदारी स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) को सौंपी गई है। एलआईयू यह पता लगाने में जुटी है कि किन साधु-संतों को वास्तव में जान का खतरा है और किन मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता है। इस जांच में साधु-संतों की पृष्ठभूमि, पूर्व घटनाएं और वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण किया जा रहा है।
एलआईयू की रिपोर्ट के आधार पर अब तक करीब 90 साधु-संतों को व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। इन्हें गनर उपलब्ध कराए गए हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे से उनकी रक्षा की जा सके। शेष आवेदनों पर एलआईयू की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार बाकी साधु-संतों को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।
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मेला क्षेत्र में लगे 65 से अधिक शिविरों की सामान्य सुरक्षा के लिए पहले से ही होमगार्ड की तैनाती की गई है। इसके अलावा 60 से अधिक शिविरों में होमगार्ड और सुरक्षा कर्मी लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि शिविरों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है ताकि संत-महात्मा और श्रद्धालु निश्चिंत होकर प्रवास कर सकें।
माघ मेले की सुरक्षा को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था में सात अपर पुलिस अधीक्षक, 14 क्षेत्राधिकारी, 29 इंस्पेक्टर, 221 दरोगा, 15 महिला दरोगा, 1593 सिपाही और 136 महिला सिपाही शामिल हैं। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए पीएसी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात की गई हैं।
मेले की आंतरिक सुरक्षा के लिए छह बीडीडीएस (बम निरोधक दस्ता) टीमें और दो एटीएस चेक टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा पीएसी की पांच बाढ़ राहत कंपनियां और सात कानून-व्यवस्था के लिए पीएसी कंपनियां सक्रिय हैं। संपूर्ण मेला अवधि के लिए चार आरएएफ कंपनियां और दो आरएएफ कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा के लिए तैनात की गई हैं।
माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से भी मजबूत किया गया है। शहर से लेकर मेला क्षेत्र तक कुल 1552 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें से 400 कैमरे केवल मेला क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन सभी कैमरों की निगरानी एक सेंट्रल कंट्रोल रूम से की जा रही है। इसके साथ ही 20 वाच टावर भी स्थापित किए गए हैं, जिससे ऊंचाई से पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखी जा सके।
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मेले में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 16 महिला हेल्प डेस्क और 17 साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं। किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी, अफवाह या साइबर अपराध की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा 761 फायरकर्मियों को भी तैनात किया गया है ताकि अग्निकांड जैसी घटनाओं से निपटा जा सके।
मेला क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए चार यातायात इंस्पेक्टर, 38 दरोगा, 381 यातायात मुख्य आरक्षी, 1088 होमगार्ड और 304 पीआरडी कर्मियों की तैनाती की गई है। भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है।
एसपी माघ मेला नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि 60 से अधिक शिविरों में होमगार्ड की तैनाती की गई है और करीब 90 साधु-संतों को गनर उपलब्ध कराए गए हैं। शेष आवेदनों की एलआईयू से जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि माघ मेले में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।