ग्रेटर नोएडा दीपक नागर हत्याकांड में इनसाइड स्टोरी: मृतक UP Police में लग जाता तो क्या होता? हत्यारों को था इस बात का डर!

ग्रेटर नोएडा में दीपक नागर की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। 30 मई को यूपी पुलिस परीक्षा देने वाले दीपक का सपना गोलियों से टूट गया। पुरानी रंजिश और 14 साल पुराने विवाद ने एक बार फिर खून-खराबे का रूप ले लिया। गांव में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कानून के बाद भी बदले की आग खत्म नहीं होती?

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 24 May 2026, 12:49 PM IST
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Greater Noida: घर से कुछ दूरी पर था वैदपुरा गांव का रहने वाला 28 साल का दीपक नागर, जब उसकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। दीपक नागर गांव के उन युवाओं में शामिल था, जो देश और अपने उत्तर प्रदेश के लिए कुछ करना चाहते थे। दीपक नागर आगामी 30 मई को यूपी पुलिस का एग्जाम देने वाला था।

दीपक ने पहले भी यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में एग्जाम दिए, लेकिन 2-3 नंबर से रह गया था। इस बार दीपक के घर वालों को उम्मीद थी कि उनका बेटा यूपी पुलिस का एग्जाम क्रॉस कर लेगा। इसके लिए दीपक नागर ने काफी तैयारी भी की थी, लेकिन उससे पहले ही हत्यारों ने दीपक को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया।

देश की सेवा करना चाहता था दीपक नागर

गांव के सूत्रों का कहना है कि दीपक नागर इस बार यूपी पुलिस में लग सकता था। इसी बात का हत्यारों को डर था। उनके मन में भय था कि अगर दीपक नागर यूपी पुलिस में लग गया तो अच्छा नहीं होगा। हालांकि, दीपक की सोच अलग थी, वह भूल चुका था कि उसके पिता किस कारण जेल गए थे। वह तो सिर्फ अपने घर को संभाल रहा था और देश की सेवा करना चाहता था, लेकिन हत्यारों ने दीपक नागर की सोच और उसके अंदर की इंसानियत को नहीं देखा। जिस मामले को कोर्ट ने खत्म कर दिया, उसी को आरोपियों ने रंजिश माना और बाप का बदला बेटे से लेते हुए मौत के घाट उतार दिया।

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कल्लू के दोनों बेटे जेल क्यों नहीं गए?

इस हत्याकांड के बाद दीपक के घर पर पुलिस का सख्त पहरा है। एक तरफ पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जबकि दूसरी तरफ दीपक के घर वालों का कहना है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है, जो मुख्य आरोपी हैं उनको अभी तक पुलिस ढूंढ नहीं पाई। पीड़ित परिवार ने गांव के ही निवासी कल्लू के दोनों बेटों पर हत्या का आरोप लगाया है।

कैसे शुरू हुई 14 साल पहले रंजिश?

जानकारी के अनुसार, यह मामला आपसी रंजिश का था। करीब 14 साल पहले कल्लू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस मामले में कल्लू के परिजनों को लगा कि उनकी हत्या अशोक ने की है। अशोक के खिलाफ इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। अशोक के अलावा दो अन्य लोग भी आरोपी बनाए गए था। जब कोर्ट में केस विचाराधीन था तो एक व्यक्ति की मौत हो गई, दूसरे व्यक्ति को उम्र कैद की सजा हो गई और सबूत नहीं मिलने पर अशोक को बरी कर दिया गया।

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कोर्ट के फैसले से कल्लू के घर वाले खुश नहीं थे। उनको लगा था कि कोर्ट ने गलत फैसला सुनाया है। इसी वजह से अशोक से बदला लेने के लिए उसके बेटे दीपक नागर की हत्या कर दी। अब गांव में मातम छाया हुआ है और हर एक व्यक्ति सवाल पूछ रहा है कि क्या 14 साल पुरानी रंजिश के बदले किसी का भाई, किसी का बेटा या किसी का भतीजा मारना उचित था?

Location :  Greater Noida

Published :  24 May 2026, 12:49 PM IST

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