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गोरखपुर के गोला नगर पंचायत में पेयजल संकट गहरा गया है। जहां एक ओर नगर पंचायत प्रशासन योजनाओं का ढिंढोरा पीट रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नगर वासियों को पानी के लिए तरसना पड रहा है।
गोरखपुर में पेयजल संकट गहराया
Gorakhpur: गर्मी के मौसम में गोला नगर पंचायत का पेयजल संकट एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। जहां एक ओर नगर पंचायत प्रशासन योजनाओं का ढिंढोरा पीट रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। वार्ड नंबर 18 में चार वर्ष पहले लगाई गई मीनी ट्यूबवेल आज भी पानी की एक बूंद सप्लाई नहीं कर पा रही है। परिणामस्वरूप स्थानीय निवासी शुद्ध पेयजल के लिए खरीदकर पीने को मजबूर हैं।
लगभग 500 की आबादी वाले इस वार्ड में वर्ष 2020-21 के आसपास मीनी ट्यूबवेल का निर्माण कराया गया था। उस समय नगर पंचायत प्रशासन ने दावा किया था कि इस ट्यूबवेल के जरिए घर-घर तक नियमित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन विडंबना यह है कि चार वर्ष बीत जाने के बाद भी यह योजना कागजों तक सीमित रही।
करीब एक वर्ष पहले वार्ड के कई घरों में पाइपलाइन बिछाई गई और नल कनेक्शन भी दिए गए, जिससे लोगों में उम्मीद जगी। मगर पाइपलाइन और कनेक्शन के बावजूद आज तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इससे स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
निवासियों का आरोप है कि मीनी ट्यूबवेल का निर्माण मानकों के विपरीत किया गया। लोहे की जगह प्लास्टिक की पाइप लगाई गई और ट्यूबवेल की गहराई भी अपर्याप्त रखी गई। यही कारण है कि नगर क्षेत्र में लगाए गए लगभग छह मीनी ट्यूबवेल पहले ही खराब हो चुके हैं। सवरू मौर्य, मोतीलाल चौरसिया, कासिम अली, सत्य प्रकाश, दीपक साहनी समेत दर्जनों स्थानीय निवासियों ने इस लापरवाही की निंदा करते हुए तत्काल ट्यूबवेल चालू कराने की मांग की है।
वार्ड 18 के सभासद श्रवण वर्मा ने बताया, “पूर्व कार्यकाल में लगाया गया ट्यूबवेल खराब हो चुका है। फिलहाल नए ट्यूबवेल का कार्य तेजी से चल रहा है। मैं ईओ गोला से मुलाकात कर इस समस्या का शीघ्र समाधान कराने का प्रयास कर रहा हूं।”
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी वैभव चौधरी ने आश्वासन देते हुए कहा कि नगर में पेयजल संकट को दूर करने के लिए हम तेजी से कार्य कर रहे हैं। डाकबंगला परिसर में बोरिंग का कार्य चल रहा है। इसे पूरा होते ही पूरे क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
गोला नगर पंचायत में हर साल गर्मी आने के साथ पेयजल समस्या उभरती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। निवासी अब सिर्फ आश्वासनों नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।