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गोरखपुर में टीईटी से जुड़े मुद्दों को लेकर हजारों शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर आक्रोश जताया। शिक्षकों ने बदलती नीतियों पर असंतोष व्यक्त करते हुए व्यावहारिक समाधान की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
बीएसए कार्यालय में शिक्षकों का जोरदार प्रदर्शन
Gorakhpur: जनपद में शिक्षक संगठनों का आक्रोश बुद्धवार को खुलकर सामने आया, जब बड़ी संख्या में शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पर एकत्र होकर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया। आक्रोशित शिक्षकों ने राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी का पुतला फूंककर अपना विरोध जताया।
प्रदर्शन में जिले के हजारों शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिक्षकों का कहना था कि टीईटी से संबंधित नीतियों और निर्णयों से कार्यरत शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है। उनका आरोप है कि बार-बार बदलते नियम और नई शर्तें शिक्षकों के सम्मान और भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही हैं। उन्होंने मांग की कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी बंद की जाए और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
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इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष राजेश पांडे ने कहा कि शिक्षक समाज लंबे समय से अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखता आ रहा है, लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी जाती तो उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ता है। ब्लॉक मंत्री संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि अगर जल्द ही सरकार और संबंधित विभाग ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में जिला कार्यसमिति सदस्य सुरेंद्र सिंह, संजय मिश्रा, अंजनी कुमार त्रिपाठी, चंद्रशेखर, नीरज राय, इंद्रदेव यादव, सुभाष यादव, अजीत यादव, विनीत मिश्रा, मोहम्मद इरशाद, विनय यादव, सचिन सिंह और आभा पांडे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि शिक्षकों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान बीएसए कार्यालय परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात रहा। हालांकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अंत में शिक्षकों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।