हिंदी
गोरखपुर की खजनी तहसील में तहसीलदार के कथित तानाशाही रवैये के विरोध में अधिवक्ताओं ने उग्र धरना-प्रदर्शन किया। कार्य बहिष्कार के चलते तहसील का कामकाज ठप रहा। अधिवक्ता तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग पर अड़े हैं।
खजनी तहसील में अधिवक्ताओं का उग्र प्रदर्शन
Gorakhpur: गोरखपुर जिले की खजनी तहसील सोमवार को उस समय आंदोलन का केंद्र बन गई, जब तहसीलदार के कथित तानाशाही और मनमाने रवैये से नाराज़ अधिवक्ताओं ने उग्र धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। तहसील परिसर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कुछ ही देर में सड़क तक पहुंच गया, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और आम जनजीवन प्रभावित हो गया।
खजनी तहसील बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाए। वकीलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा न केवल अधिवक्ताओं बल्कि आम वादकारियों के साथ भी लगातार असम्मानजनक और अमर्यादित व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों और मौखिक आपत्तियों के बावजूद अधिकारी के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ, जिससे मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
गोरखपुर: गगहा क्षेत्र भैसही में भाजपा नेता पर जानलेवा हमला, गोली लगने से घायल
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व खजनी तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के.के. सिंह ने किया। उनके साथ मंत्री राजनाथ दुबे, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, अनूप सिंह, कमलेश पांडेय, बार संघ के चुनाव आयुक्त रामप्रीत यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता महेश दुबे सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में तहसीलदार के तत्काल स्थानांतरण की मांग की।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ता न्यायिक प्रक्रिया का अहम स्तंभ होते हैं। यदि उन्हें ही अपमान और उपेक्षा का सामना करना पड़े तो इसका सीधा असर न्याय व्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार न केवल अधिवक्ताओं बल्कि आम जनता के अधिकारों का भी हनन है।
अधिवक्ताओं ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक व उग्र किया जाएगा। वकीलों ने कहा कि वे जरूरत पड़ने पर जिलेभर में आंदोलन फैलाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
स्थिति को नियंत्रित करने और तनाव कम करने के उद्देश्य से एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिवक्ताओं से बातचीत कर आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास किया और प्रशासन की ओर से समाधान का आश्वासन भी दिया। हालांकि वार्ता के बावजूद अधिवक्ता किसी समझौते पर सहमत नहीं हुए।
गोरखपुर के लाल ने रचा इतिहास: गुफरान हाशमी की बड़ी कामयाबी, पास की एफएमजीई परीक्षा
अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। उनकी मुख्य मांग तहसीलदार का तत्काल स्थानांतरण है। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक न तो धरना समाप्त होगा और न ही कार्य बहिष्कार वापस लिया जाएगा।
अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो मुख्यमंत्री के गोरखपुर आगमन के दौरान भी धरना-प्रदर्शन और हड़ताल की रणनीति पर अमल किया जाएगा। फिलहाल खजनी तहसील का कामकाज पूरी तरह ठप बना हुआ है।