दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे बच्चे को मिला नया जीवन, डॉक्टरों ने कर दिखाया कमाल

जिस बीमारी की असली वजह बड़े शहरों में भी स्पष्ट नहीं हो सकी, उसे गोरखपुर में न केवल पहचाना गया, बल्कि आधुनिक दूरबीन तकनीक से सफल सर्जरी कर एक 9 वर्षीय बच्चे का घुटना स्थायी नुकसान से बचा लिया गया।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 2 July 2026, 3:10 AM IST
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Gorakhpur: जिस बीमारी की असली वजह बड़े शहरों में भी स्पष्ट नहीं हो सकी, उसे गोरखपुर में न केवल पहचाना गया, बल्कि आधुनिक दूरबीन तकनीक से सफल सर्जरी कर एक 9 वर्षीय बच्चे का घुटना स्थायी नुकसान से बचा लिया गया। संकट मोचन हॉस्पिटल में घुटना एवं स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंह “श्रीनेत” ने दुर्लभ जन्मजात समस्या ‘डिस्कॉइड मेनिस्कस’ की सफल आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी कर बच्चे को दर्द, घुटने की लॉकिंग और भविष्य में गठिया के खतरे से बड़ी राहत दिलाई।

बच्चा लंबे समय से दाहिने घुटने में दर्द, चलते समय झटका लगने और घुटने के अटकने जैसी समस्या से परेशान था। कुछ दिन पहले दौड़ते समय अचानक तेज दर्द होने के बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। दर्द इतना बढ़ गया कि सामान्य रूप से चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया।

कई शहरों में भटके परिजन

परिजनों ने मुंबई सहित कई बड़े शहरों में विशेषज्ञों से सलाह ली, लेकिन बीमारी की सही वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। अंततः बच्चे को गोरखपुर के संकट मोचन हॉस्पिटल लाया गया

डॉ. अमित सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में उपचार का निर्णय बेहद संवेदनशील होता है। बच्चे की उम्र मात्र 9 वर्ष थी। यदि पूरा मेनिस्कस निकाल दिया जाता तो भविष्य में घुटने में गठिया यानी ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा काफी बढ़ सकता था। इससे बच्चे की दौड़ने, खेलने और सामान्य शारीरिक गतिविधियों पर भी गंभीर असर पड़ सकता था।

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इसी चुनौती को देखते हुए डॉ. अमित सिंह और उनकी टीम ने आर्थ्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान मेनिस्कस के केवल अतिरिक्त बड़े और क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाया गया, जबकि स्वस्थ हिस्से को बचाते हुए उसका सफल रिपेयर किया गया। इस निर्णय से बच्चे के घुटने की प्राकृतिक संरचना सुरक्षित रही और भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों की आशंका भी काफी हद तक कम हो गई।

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उन्होंने कहा कि समय पर सही पहचान और उचित सर्जिकल निर्णय के कारण बच्चे का घुटना सुरक्षित रखा जा सका। अब बच्चे को दर्द से राहत मिलेगी और वह आने वाले समय में सामान्य बच्चों की तरह दौड़ने, खेलने और दैनिक गतिविधियों में भाग ले सकेगा।

Location :  Gorakhpur

Published :  2 July 2026, 3:02 AM IST

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