आधार से सैलरी स्लिप तक सब फर्जी, सरकारी योजना के नाम पर करोड़ों की ठगी, जानें कैसे हुआ बरेली के इस बड़े गैंग का खुलासा

बरेली के भोजीपुरा में पुलिस ने सरकारी योजना के नाम पर लोगों को झांसा देकर बैंक से लाखों रुपये का लोन पास कराने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर 3.50 लाख रुपये कैश, 75 ATM कार्ड, 28 चेकबुक, सात बैंक पासबुक, मोबाइल, सिम और बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरोह फर्जी नौकरी और अच्छी सिबिल दिखाकर 15 से 20 लाख रुपये तक का लोन स्वीकृत कराता था।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 31 August 2026, 6:21 PM IST
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Bareilly News: सरकारी योजना का नाम सुनाकर अगर कोई आपको लाखों रुपये का लोन दिलाने का दावा करे तो सावधान हो जाइए। बरेली में ऐसा ही एक संगठित गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा है, जो लोगों को सरकारी योजना का झांसा देकर बैंक से लाखों रुपये का लोन पास कराता था और फिर रकम का बड़ा हिस्सा खुद हड़प लेता था। गिरोह के सदस्य इतने शातिर थे कि आधार कार्ड से लेकर नौकरी के दस्तावेज, सैलरी स्लिप और फॉर्म-16 तक फर्जी तैयार कर देते थे। भोजीपुरा थाना पुलिस ने एसओजी और सर्विलांस टीम के साथ मिलकर कार्रवाई करते हुए गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 3.50 लाख रुपये नकद के अलावा 75 एटीएम कार्ड, 28 चेकबुक, सात बैंक पासबुक, 12 मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, आधार-पैन कार्ड और बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। मामले में एक आरोपी अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

देर रात मकान पर पुलिस ने मारा छापा

एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्र ने बताया कि एसएसपी बरेली के निर्देश पर जिले में अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान भोजीपुरा पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम को गिरोह के बारे में अहम जानकारी मिली। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने मॉडर्न विलेज स्थित एक मकान पर देर रात करीब 1 बजकर 27 मिनट पर दबिश दी। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद आरोपियों में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान राम नयन गुप्ता उर्फ कृष्ण कन्हैया, राकेश गुप्ता, अनिल गुप्ता और ऋषभ कुमार सक्सेना को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने जब मकान की तलाशी ली तो वहां से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, चेकबुक, बैंक पासबुक और फर्जी दस्तावेज मिले। बरामद सामान देखकर पुलिस भी हैरान रह गई।

आधार कार्ड से शुरू होता था फर्जीवाड़े का खेल

पुलिस की पूछताछ में गिरोह के काम करने का तरीका सामने आया है। आरोपियों के मुताबिक, सबसे पहले ऐसे लोगों को तलाशा जाता था जिन्हें बैंक से लोन की जरूरत होती थी। इसके बाद उनके आधार कार्ड पर नया सिम जारी कराया जाता था। इसी के जरिए उनके दस्तावेजों में पता बदलने का खेल किया जाता था। इसके बाद अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। गिरोह यहीं नहीं रुकता था। लोगों को बैंक की नजर में सरकारी या अच्छी नौकरी करने वाला कर्मचारी दिखाने के लिए फर्जी परिचय पत्र तैयार किए जाते थे। इसके अलावा फर्जी फॉर्म-16 और वेतन पर्चियां भी बनाई जाती थीं।

खाते में दो-तीन महीने भेजते थे फर्जी सैलरी

फर्जी नौकरी का भरोसा पैदा करने के लिए आरोपियों ने ठगी का पूरा सिस्टम तैयार कर रखा था। पुलिस के मुताबिक, लाभार्थियों के बैंक खातों में लगातार दो-तीन महीने तक वेतन के नाम पर रकम ट्रांसफर की जाती थी। इससे बैंक रिकॉर्ड में ऐसा दिखाई देता था कि संबंधित व्यक्ति की नियमित नौकरी है और उसके खाते में हर महीने सैलरी आती है। इसके बाद उसकी बैंक प्रोफाइल मजबूत दिखाने और अच्छी सिबिल हिस्ट्री का फायदा उठाकर लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी। गिरोह बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक समेत दूसरे बैंकों से 15 से 20 लाख रुपये तक का लोन स्वीकृत कराने का प्रयास करता था।

लाभार्थी को सरकारी योजना का झांसा

पूरे खेल में सबसे बड़ा हथियार था सरकारी योजना का नाम। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य लोगों को बताते थे कि उनका लोन प्रधानमंत्री योजना के तहत स्वीकृत हुआ है। लोगों को सरकारी योजना का नाम सुनकर भरोसा हो जाता था और वे आरोपियों के बताए तरीके से बैंक की प्रक्रिया पूरी कर लेते थे। लोन पास होने के बाद गिरोह रकम निकालने का खेल शुरू करता था। आरोपियों के पास मौजूद एटीएम कार्ड और चेकबुक इसी काम में इस्तेमाल किए जाते थे। लोन की रकम का बड़ा हिस्सा चेक और एटीएम के जरिए निकाल लिया जाता था और फिर गिरोह के सदस्य आपस में रकम बांट लेते थे।

20 लाख का लोन कराया पास, पीड़ित को मिले सिर्फ 71 हजार

पुलिस पूछताछ में ठगी का एक मामला खास तौर पर सामने आया है। पुलिस के अनुसार, लखीमपुर खीरी निवासी एक व्यक्ति के नाम पर गिरोह ने करीब 20 लाख रुपये का लोन पास कराया था, लेकिन इतनी बड़ी रकम का लोन मिलने के बावजूद पीड़ित को सिर्फ 71 हजार रुपये दिए गए। बाकी रकम आरोपियों ने कथित तौर पर अपने बीच बांट ली। यानी जिस व्यक्ति के नाम पर बैंक से लाखों रुपये का कर्ज लिया गया, उसे मामूली रकम देकर बाकी पैसे पर गिरोह ने कब्जा कर लिया। ऐसे मामलों में पीड़ित के सामने बाद में बैंक की किश्त और कर्ज चुकाने की बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।

75 ATM और 28 चेकबुक ने खोला पूरा राज

पुलिस की बरामदगी में 75 एटीएम कार्ड और 28 चेकबुक शामिल हैं। इसके अलावा सात बैंक पासबुक भी मिली हैं। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने कई लोगों के नाम पर इसी तरह बैंकिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल किया होगा। तलाशी में 12 मोबाइल फोन और 11 सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं। इसके साथ ही कैनरा बैंक की मुहर, फर्जी वेतन पर्चियां, फर्जी पहचान पत्र, आधार-पैन कार्ड और दूसरे दस्तावेज भी मिले हैं। अब पुलिस इन दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर गिरोह के पुराने मामलों और इससे जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने में जुटी है।

Location :  Bareilly

Published :  31 August 2026, 6:21 PM IST

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