राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित पूर्व IPS राम यश सिंह ने अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में बनाई थी पहचान

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राम यश सिंह का 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बिहार कैडर के 1985 बैच के अधिकारी रहे सिंह ने कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी संभाली। साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से पुलिस और सामाजिक जगत में शोक की लहर है।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 27 April 2026, 7:19 PM IST
google-preferred

Lucknow: सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी राम यश सिंह का रविवार को 83 वर्ष की उम्र में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही पुलिस विभाग, प्रशासनिक जगत और उनके परिचितों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने एक अनुशासित, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में पहचान बनाई थी।

राम यश सिंह बिहार कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण जिलों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली। पुलिस सेवा में उनकी छवि सख्त लेकिन निष्पक्ष अधिकारी की रही। उन्होंने पुलिस विभाग में रहते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में अहम योगदान दिया।

कई जिलों में संभाली जिम्मेदारी, वीरता पदक से हुए सम्मानित

राम यश सिंह ने अपने करियर में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, जहानाबाद और गोड्डा जैसे संवेदनशील जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इन जिलों में कार्य करते हुए उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया और प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया।

बदायूँ HPCL दोहरा हत्याकांड: मुख्य आरोपी पर रासुका, पुलिस का ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश

सेवा के दौरान उनके साहस और उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पुलिस सेवा में उनके योगदान और बहादुरी का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई जटिल मामलों को संभाला और विभाग में पेशेवर कार्यशैली की मिसाल पेश की।

राम यश सिंह ने बिहार पुलिस में दीर्घकालीन सेवा देने के बाद डीआईजी (इंटेलिजेंस) के पद से सेवानिवृत्ति प्राप्त की। उनके सहयोगियों के अनुसार वे हमेशा अनुशासन और कर्तव्य को प्राथमिकता देते थे।

सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रखी जनसेवा

पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद भी राम यश सिंह ने जनसेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस शुरू की और लोगों की कानूनी मदद करते रहे। वे समाज और न्याय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते थे। वे उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ यश के पिता थे। परिवार में उनकी पत्नी गीता सिंह सहित अन्य सदस्य हैं। उनके निधन से परिवार गहरे शोक में है।

बदायूँ HPCL दोहरा हत्याकांड: मुख्य आरोपी पर रासुका, पुलिस का ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश

राम यश सिंह का जीवन अनुशासन, सादगी और सेवा भावना का उदाहरण माना जाता है। उनके योगदान और कार्यशैली को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके निधन से पुलिस सेवा जगत ने एक अनुभवी और प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है।

Location :  Lucknow

Published :  27 April 2026, 6:52 PM IST

Related News

No related posts found.

Advertisement