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बिना परमिट पेड़ कटान
Deoria : एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। जनपद में वन विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में हरे-भरे और फलदार पेड़ों की अवैध कटाई बेखौफ तरीके से जारी है और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर रही है।
देवरिया में अवैध पेड़ कटान को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। सिसई गांव में बिना परमिट हरे और फलदार पेड़ों की कटाई के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है, जबकि पर्यावरण प्रेमियों ने उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।… pic.twitter.com/OZOSrKlKpk
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) June 16, 2026
पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान को लेकर चल रही सरकारी मुहिम के बीच अवैध पेड़ कटान का मामला लगातार चर्चा में है। जहां एक ओर परिवहन मंत्री और जिला प्रभारी दयाशंकर सिंह के नेतृत्व में पर्यावरण को बढ़ावा देने और एक वृक्ष दस पुत्र समान जैसे संदेशों को धरातल पर उतारने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में हरे पेड़ों की कटाई लगातार सामने आ रही है।
भटनी थाना क्षेत्र के सिसई ग्राम सभा में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना किसी वैध अनुमति के फलदार और कीमती पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार बेखौफ होकर पेड़ों पर आरी चला रहे हैं और वन विभाग तथा स्थानीय पुलिस पूरी तरह मौन बनी हुई है।
एक तरफ सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चला रही है। वहीं दूसरी तरफ पुराने और छायादार पेड़ों की कटाई पर्यावरण संरक्षण के दावों को कमजोर कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर लकड़ी का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है और कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार देवरिया में पहले भी अवैध पेड़ कटान और ठेकेदारों से जुड़े विवाद सामने आ चुके हैं। कई मामलों में वन विभाग और ठेकेदारों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी और उच्च वन अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटान पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र का हरित आवरण तेजी से घट सकता है और पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है।
अब बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार हरियाली बचाने के लिए अभियान चला रही है तो जमीनी स्तर पर पेड़ों की सुरक्षा किसके भरोसे है। क्या जिम्मेदार विभाग केवल दावों तक सीमित रहेंगे या फिर अवैध कटान पर सख्त कार्रवाई होगी। यह आने वाला समय तय करेगा।
Location : Deoria
Published : 17 June 2026, 5:08 AM IST