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महराजगंज में FRK चावल की सप्लाई में बड़ी मनमानी का खुलासा हुआ है। टेंडर रेट से दोगुनी कीमत वसूलने वाले 7 बड़े मिलरों पर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने सख्त कार्रवाई करते हुए जांच के बाद दर घटाकर 30 कर दी। आदर्श राइस मिलर्स वेलफेयर एसोसिएशन की शिकायत पर हुई कार्रवाई से छोटे मिलरों को बड़ी राहत मिली है।
FRK चावल
Maharajganj: जनपद में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) चावल की आपूर्ति को लेकर चल रही मनमानी आखिरकार जिलाधिकारी की सख्ती के आगे झुक गई। टेंडर रेट से दोगुनी कीमत वसूल रहे 7 बड़े FRK सप्लायर मिलरों पर डीएम संतोष कुमार शर्मा ने लगाम कसते हुए जांच कराई। जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद FRK चावल की डिलीवरी दर घटाकर 30 प्रति किलो कर दी गई है।
FRK चावल सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और धान खरीद योजना का अहम हिस्सा है। जिसका मकसद आमजन को पोषणयुक्त चावल उपलब्ध कराना है। लेकिन इसी योजना को कुछ प्रभावशाली मिलर अपनी कमाई का जरिया बनाए हुए थे।
आदर्श राइस मिलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सचिंद्र कुमार गुप्ता उर्फ गुड्डू के नेतृत्व में तीन दर्जन से अधिक राइस मिलरों ने जिलाधिकारी से मिलकर लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 6 मिलें महराजगंज और 1 मिल देवरिया के उसर बाजार की FRK सप्लायर हैं। जिन्हें 41.89 प्रति किलो की दर से टेंडर मिला है लेकिन वे अन्य मिलरों को FRK चावल 11,200 प्रति कुंतल के हिसाब से जबरन बेच रहे थे।
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मिलरों का कहना था कि मनमानी दर पर FRK न खरीदने पर धमकियां दी जाती थीं और मिल बंद कराने तक की चेतावनी दी जाती थी। इस दबाव के कारण कई राइस मिलों में CMR (कस्टम मिल्ड राइस) का संप्रदान बाधित हो गया था, जिससे सरकारी धान खरीद योजना पर सीधा असर पड़ रहा था।
शिकायत में जिन 7 FRK सप्लायर मिलों के नाम सामने आया था। उनमें मेसर्स कृष्णा एग्रो (बसंतपुर), रहेनियम फार्मर (भागाटार), संथा गारिक एग्रो (महदेवा), जय मां दुर्गा ट्रेडर्स (सेमरा राजा), विंध्यवासिनी शक्ति एग्रो राइस मिल (पनियरा), शिव राइस मिल (कसमरिया) और न्यूट्री फूड्स (उसर बाजार, देवरिया) शामिल हैं।
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संगठन का आरोप था कि मंडल स्तर पर गिने-चुने लोगों को ठेका देकर पूरे FRK सिस्टम पर कब्जा जमाया गया है। जिससे छोटे मिलरों का शोषण हो रहा है। इसे “बड़ी मछली द्वारा छोटी मछली को निगलने” जैसा बताया गया था।
जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने आरोपों की पुष्टि की, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए FRK चावल की डिलीवरी दर घटाकर 30 कर दी। डीएम की इस कार्रवाई से राइस मिल उद्योग में राहत की सांस ली गई है। कुछ मिलरों ने कहा कि अगर यह कार्रवाई कुछ दिन पहले हो जाती, तो हमें लाखों रुपये की लूट से बचाया जा सकता था।