डाइनामाइट न्यूज की खबर का असर: देवरिया में बच्चे की मौत के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित

चार वर्षीय बच्चे की मौत के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी पर कार्रवाई क्यों हुई? सेप्टिक टैंक के निर्माण मानकों और विभागीय निगरानी से जुड़े सवालों की जांच अब एक महीने में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 9 October 2026, 7:41 PM IST
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Deoria: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बैतालपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत उधोपुर में शौचालय निर्माण के दौरान सेप्टिक टैंक में गिरकर चार वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी सोनू कुमार यादव को निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी के 7 अक्टूबर 2026 के अनुमोदन के बाद हुई इस कार्रवाई ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों और विभागीय निगरानी की जिम्मेदारी को फिर चर्चा में ला दिया है। मामले की जांच के लिए अधिकारी नामित कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत हो रहा था निर्माण

जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार, उधोपुर निवासी गीता देवी पत्नी दीनानाथ प्रसाद को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय निर्माण के लिए पहली किस्त जारी की गई थी। वाटर लॉगिंग की समस्या के कारण लाभार्थी सेप्टिक टैंक का निर्माण करा रही थीं। इसी दौरान करीब चार वर्षीय बच्चा टैंक में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

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जांच में निर्माण मानकों से जुड़ी कमियां सामने आईं

प्रारंभिक जांच में सेप्टिक टैंक का आकार निर्धारित मानकों से काफी बड़ा पाए जाने की बात सामने आई है। संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी पर पर्यवेक्षण संबंधी जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन नहीं करने का आरोप है। साथ ही लाभार्थी द्वारा मानकों के विपरीत निर्माण कराए जाने को भी हादसे से जुड़ा कारण माना गया है। इन पहलुओं की विभागीय जांच की जा रही है।

निलंबित अधिकारी गौरीबाजार ब्लॉक से संबद्ध

जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी सोनू कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें विकास खंड गौरीबाजार से संबद्ध किया गया है। यह कार्रवाई बच्चे की मौत से जुड़े मामले में विभागीय स्तर पर की गई है।

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एक महीने में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश

विभागीय जांच के लिए सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी (प्राविधिक), देवरिया को जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्हें नियमानुसार आरोप पत्र तैयार कर अनुमोदन के बाद संबंधित कर्मचारी को उपलब्ध कराने और एक महीने के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा मानकों और निगरानी पर उठे सवाल

इस घटना ने शौचालय निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, निर्धारित मानकों के पालन और विभागीय पर्यवेक्षण की अहमियत को रेखांकित किया है। अब जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसे से जुड़े किन पहलुओं के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है और विभागीय स्तर पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

Location :  Deoria

Published :  9 October 2026, 7:40 PM IST

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