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इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में मारपीट को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को हिरासत में पीटना पुलिस के आधिकारिक कर्तव्यों का हिस्सा नहीं है। यह एक गंभीर अपराध है, जिसे ड्यूटी निभाने के नाम पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए बांदा में तैनात रहीं पुलिसकर्मी शिवानी जोशी समेत दो अन्य पुलिसकर्मियों की डिस्चार्ज एप्लीकेशन खारिज करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। मामला बांदा जिले के बबेरू थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
मामले के अनुसार, मई 2022 में एक मुकदमे की जांच के दौरान पुलिसकर्मी नोटिस लेकर एक घर पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान आरोपी पक्ष ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और उनके सरकारी दस्तावेज व नोटिस फाड़ दिए।
इसके बाद पुलिस ने गांव के चार लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं। बाद में हिरासत में लिए गए लोगों के परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट, छेड़छाड़ और लूटपाट जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मियों ने हिरासत में लिए गए लोगों के हाथ-पैर बांधकर उनकी पिटाई की। मारपीट के कारण कूल्हे, जांघ, छाती और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं।
मेडिकल रिपोर्ट में भी चोटों की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। आरोप तय होने से पहले आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन दाखिल की थी।
पुलिसकर्मियों की ओर से दलील दी गई थी कि घटना उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान हुई थी। इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सक्षम प्राधिकारी की अनुमति जरूरी है।
हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को हिरासत में बांधकर बार-बार पीटना पुलिस के आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इसे यह कहकर भी सही नहीं ठहराया जा सकता कि जांच के दौरान पुलिसकर्मियों ने केवल अपने अधिकारों की सीमा पार की थी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिरासत में हिंसा गंभीर अपराध है और कानून लागू करने वाले अधिकारियों से ऐसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जाती।
रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मियों ने इससे पहले संज्ञान और समन आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हालांकि, 8 फरवरी 2024 को सक्षम अदालत में पेश होने और जमानत आवेदन दाखिल करने की अनुमति मिलने के बाद उन्होंने वह याचिका वापस ले ली थी।
Location : Prayagraj
Published : 12 September 2026, 2:09 PM IST