पापा या मामा? दो मासूमों के दिल का फैसला सुनेगा इलाहाबाद हाईकोर्ट, 24 जुलाई को होगा बड़ा खुलासा

मां के निधन के बाद दो मासूम बच्चों की अभिरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला लिया है। कोर्ट 24 जुलाई को बच्चों से सीधे बातचीत कर उनकी इच्छा जानेगा कि वे पिता के साथ रहना चाहते हैं या मामा-नानी के साथ। इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 13 July 2026, 3:32 PM IST
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Allahabad: मां के निधन के बाद दो मासूम बच्चों की अभिरक्षा को लेकर चल रहे भावनात्मक विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने फैसला किया है कि वह किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों बच्चों से स्वयं बातचीत करेगी और उनकी इच्छा जानेगी। अदालत यह समझने की कोशिश करेगी कि बच्चे अपने पिता के साथ रहना चाहते हैं या फिर अपने मामा और नानी के साथ।

डॉक्टर पिता ने दायर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

मामला वाराणसी के एक डॉक्टर से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उनकी पत्नी का 13 मई को फेफड़ों के कैंसर से निधन हो गया था। पत्नी की मौत के बाद उनके दोनों नाबालिग बेटे मामा अपने साथ ले गए। पिता का आरोप है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद बच्चों को वापस नहीं भेजा गया।

याचिका में यह भी बताया गया कि बच्चों का शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में कक्षा दो में दाखिला कराया जा चुका है और उनकी फीस भी जमा कर दी गई है। पिता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह बच्चों की शिक्षा, देखभाल और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उठाने में सक्षम हैं।

बच्चों ने पुलिस से कही अलग इच्छा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पुलिस से बातचीत में दोनों बच्चों ने अपनी नानी और मामा के साथ रहने की इच्छा जताई थी। इस जानकारी के बाद अदालत ने मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए बच्चों की भावनाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।

हाईकोर्ट ने कही अहम बात

न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में मां के निधन के बाद जैविक पिता ही बच्चों की वैध अभिरक्षा के हकदार होते हैं। हालांकि यदि यह साबित हो जाए कि पिता के साथ रहना बच्चों के हित में नहीं है, तभी स्थिति अलग हो सकती है। फिलहाल रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह लगे कि बच्चों की सुरक्षा या हित पिता के साथ खतरे में है।

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24 जुलाई को बच्चों को कोर्ट में होना होगा पेश

अदालत ने दोनों बच्चों को 24 जुलाई को मामा के साथ कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। न्यायालय स्वयं बच्चों से बातचीत करेगा और उनकी इच्छा तथा उनके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला करेगा। 

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कोर्ट की सख्त चेतावनी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई पर बच्चों को पेश नहीं किया गया तो संबंधित पुलिस अधिकारी को हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ और बच्चों को पेश करने के लिए क्या प्रयास किए गए।

Location :  Allahabad

Published :  13 July 2026, 3:32 PM IST

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