पौधरोपण नहीं, भ्रष्टाचार का जरिया, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर Akhilesh Yadav ने क्यों उठाए गंभीर सवाल?

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को पर्यावरण संरक्षण के बजाय भ्रष्टाचार और बजट के दुरुपयोग का जरिया बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 35 करोड़ पौधे लगाने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उचित देखभाल न होने से पौधे नष्ट हो जाते हैं।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 13 July 2026, 2:43 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' मेगा-अभियान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के पौधरोपण अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार से जुड़ा कार्यक्रम बताया। उन्होंने दावा किया कि सरकार का ध्यान पर्यावरण संरक्षण के बजाय इन योजनाओं के लिए आवंटित बजट पर अधिक है।

'वृक्षारोपण नहीं, भ्रष्टाचार का जरिया'

सपा मुख्यालय से जारी एक बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य में 35 करोड़ पौधे लगाने की घोषणा पर्यावरण संरक्षण के वास्तविक प्रयास के बजाय सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का जरिया बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पौधरोपण अभियानों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी जमीन पर कोई ठोस लाभ नहीं दिखता। उनके अनुसार, पिछले कई वर्षों में लगाए गए पौधों का कोई ठोस असर नहीं दिखा है और उचित देखभाल के अभाव में उनमें से अधिकांश नष्ट हो गए हैं।

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'योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन निगरानी नहीं होती'

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि सरकार हर साल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाती है, लेकिन अभियान खत्म होने के बाद पौधों की देखभाल और सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी विभाग योजनाओं के वास्तविक कार्यान्वयन के बजाय बजट के उपयोग को प्राथमिकता देते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

अवैध कटाई और पर्यावरण से जुड़े सवाल

अखिलेश यादव ने राज्य में पेड़ों की अवैध कटाई और घटते वन क्षेत्र को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तर्क दिया कि यदि पर्यावरण संरक्षण वास्तव में प्राथमिकता होती, तो हर साल बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और हरित क्षेत्र में कमी देखने को नहीं मिलती। उन्होंने इसे भविष्य के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बताया।

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नदी सफाई अभियान की आलोचना

पूर्व मुख्यमंत्री ने नदी सफाई के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि गंगा, यमुना और अन्य नदियों की सफाई के दावों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। अपने कार्यकाल के दौरान गोमती नदी और रिवरफ्रंट परियोजना के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय नदी संरक्षण के लिए ठोस प्रयास किए गए थे, जबकि मौजूदा सरकार उन उपलब्धियों को आगे बढ़ाने में विफल रही है।

Location :  Lucknow

Published :  13 July 2026, 2:43 PM IST

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