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सेक्टर-150 में लोटस ग्रीन बिल्डर का एक अधूरा मॉल बना हुआ है। उसके खुले बेसमेंट में लंबे समय से पानी भरा हुआ था और सुरक्षा के नाम पर कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाया गया था।
बिल्डर अभय कुमार गिरफ्तार
Noida: नोएडा से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने नामी बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया है। मृतक इंजीनियर युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर दो नामी निर्माण कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
पिता की शिकायत से खुला मामला
इंजीनियर युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि उनके बेटे की मौत सामान्य हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा है। शिकायत के आधार पर नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने एमजे विशटाउन प्लानर लिमिटेड और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
बिल्डर अभय कुमार की गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज की और सबूतों के आधार पर बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि अभय कुमार की भूमिका निर्माण कार्य और साइट की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई थी।
परिजनों को इंसाफ की उम्मीद
युवराज की मौत के बाद से परिवार सदमे में है। पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि उनका बेटा मेहनती था और नौकरी के जरिए परिवार का भविष्य संवारना चाहता था। अब वे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं।
पुलिस जांच जारी
नॉलेज पार्क थाना पुलिस के अनुसार दोनों निर्माण कंपनियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। दस्तावेज, साइट से जुड़े रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयान खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला?
सेक्टर-150 में लोटस ग्रीन बिल्डर का एक अधूरा मॉल बना हुआ है। उसके खुले बेसमेंट में लंबे समय से पानी भरा हुआ था और सुरक्षा के नाम पर कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाया गया था। रविवार देर रात युवा इंजीनियर युवराज मेहता अपनी कार के साथ उसी बेसमेंट में फंस गए। पानी ज्यादा होने और अंधेरा होने की वजह से वे बाहर नहीं निकल पाए और डूबकर उनकी मौत हो गई।
एसआईटी गठित
घटना के वक्त मौके पर दमकल, पुलिस और SDRF टीमें मौजूद थीं लेकिन युवराज को जिंदा निकालने में देरी पर सवाल उठे। इधर, बिल्डर की जवाबदेही, प्राधिकरण की निगरानी और रेस्क्यू एजेंसियों की तैयारी पर भी गंभीर आरोप लगे। मामला बढ़ा तो सरकार ने संज्ञान लिया और जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी।