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मेरठ के लिसाड़ी गेट इलाके में पारिवारिक विवाद ने अजीब मोड़ लिया है। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की खास रिपोर्ट
देवर के साथ भागने वाली महिला अपने पति के साथ
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां महज दाढ़ी को लेकर शुरू हुई घरेलू अनबन तलाक तक जा पहुंची।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार, पति की दाढ़ी पत्नी को इतनी नापसंद थी कि वह अपने ही देवर के साथ फरार हो गई। मामला सामने आने के बाद न सिर्फ मोहल्ले में चर्चा का विषय बन गया, बल्कि थाने तक हंगामा पहुंचा और अंत में मामला तीन तलाक पर खत्म हुआ।
दाढ़ी बनी विवाद का कारण
लिसाड़ी गेट निवासी शाकिर की शादी सात महीने पहले इंचौली निवासी अर्शी से हुई थी। शाकिर का आरोप है कि उसकी पत्नी को उसकी दाढ़ी बिल्कुल पसंद नहीं थी। इस बात को लेकर दोनों में अक्सर बहस होती थी। लेकिन मामला तब चौंकाने वाला हो गया जब अर्शी अपने ही देवर साबिर के साथ घर से भाग गई।
करीब तीन घंटे तक थाने में हुआ हंगामा
परिजनों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अर्शी और साबिर को खोज निकाला और 30 अप्रैल को दोनों को घर वापस ले आई। मगर घर लौटते ही दोनों पक्षों में फिर से जबरदस्त झगड़ा हुआ, जिसके चलते पुलिस को दोबारा मौके पर पहुंचना पड़ा। मामला शांत कराने के लिए दोनों को थाने ले जाया गया, जहां करीब तीन घंटे तक सुलह-समझौते की कोशिशें की जाती रहीं।
"शाकिर मर्द बनने के लायक नहीं"
थाने में अर्शी ने स्पष्ट रूप से शाकिर के साथ रहने से इनकार कर दिया। उसने आरोप लगाया कि शाकिर मर्द बनने के लायक नहीं है और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर है। अर्शी ने तलाक के एवज में ढाई लाख रुपये की मांग रख दी। इस पर बुरी तरह नाराज़ शाकिर ने मौके पर ही उसे तीन तलाक दे दिया।
शाकिर ने कहा, "मेरी दाढ़ी मेरी पहचान"
शाकिर ने कहा, "मेरी दाढ़ी मेरी पहचान है। अगर मुझे अपनी दाढ़ी के लिए दस बीवियां छोड़नी पड़ें, तो भी छोड़ दूंगा, लेकिन दाढ़ी नहीं कटेगी।" इसके साथ ही थाने में दोनों पक्षों की सहमति से एक लिखित समझौता किया गया, जिसमें तय हुआ कि दोनों अब अलग-अलग रहेंगे और एक-दूसरे के जीवन में कोई दखल नहीं देंगे।
बीवी पर लगाए गंभीर आरोप
शाकिर ने यह भी आरोप लगाया कि शादी के बाद उसके ससुराल वालों ने कोई वादा नहीं निभाया और न ही दहेज में कुछ दिया। इसके अलावा उसने दावा किया कि अर्शी न तो नमाज पढ़ती थी न ही बुर्का पहनती थी और धार्मिक बातों का मजाक उड़ाती थी। उसने कहा, "मेरे लिए मेरा धर्म सबसे ऊपर है।"