मुजफ्फरनगर डीएम तक पहुंचा इस्लामिया इंटर कॉलेज का मामला, बदहाली और भ्रष्टाचार के आरोपों से मचा बवाल

मुजफ्फरनगर के ऐतिहासिक इस्लामिया इंटर कॉलेज की बदहाली और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता शारिक खान ने कॉलेज प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए डीएम को ज्ञापन सौंपा है।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 16 June 2026, 5:01 AM IST
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Muzaffarnagar : जिले के सबसे पुराने और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों में शामिल इस्लामिया इंटर कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है। कॉलेज की बदहाल स्थिति, कथित वित्तीय अनियमितताओं और विकास कार्यों में लापरवाही के आरोप अब सीधे जिला प्रशासन तक पहुंच चुके हैं। मामला डीएम तक पहुंचने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अब इस ऐतिहासिक धरोहर की तस्वीर बदलने वाली है या फिर यह विवाद सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

डीएम को सौंपा गया 5 सूत्रीय ज्ञापन

सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र हितैषी शारिक खान ने रुड़की रोड स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता कर कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कॉलेज में लंबे समय से विकास कार्य ठप पड़े हैं और छात्रों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को 5 सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस दौरान भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने भी समर्थन जताया।

बदहाली के आरोपों से घिरा ऐतिहासिक कॉलेज

शारिक खान ने कहा कि 1927 में स्थापित यह कॉलेज मुजफ्फरनगर की तालीमी विरासत है, लेकिन आज इसकी हालत बेहद खराब हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को टूटी बेंचों, जर्जर भवनों और बुनियादी सुविधाओं के बिना पढ़ाई करनी पड़ रही है। न तो आधुनिक कंप्यूटर लैब है और न ही पर्याप्त लाइब्रेरी सुविधा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

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पांच बड़ी मांगें रखी गईं

ज्ञापन में प्रमुख रूप से जीर्ण-शीर्ण भवन को हटाकर आधुनिक कैंपस बनाने, परिसर में डिग्री कॉलेज की स्थापना, स्मार्ट लाइब्रेरी और आधुनिक लैब की व्यवस्था, प्रबंधन समिति को भंग करने और पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग की गई है। आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ कागजी खर्च दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ।

अभिभावकों में भी नाराजगी

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि हर साल फीस और विकास शुल्क लेने के बावजूद बच्चों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं। साफ पानी, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षित कक्षाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई गई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

मामला डीएम तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त होने की पुष्टि की है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच नियमानुसार कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस ऐतिहासिक कॉलेज की तस्वीर वाकई बदल पाएगी या यह विवाद एक और फाइल में दबकर रह जाएगा।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  16 June 2026, 4:26 AM IST

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