अयोध्या का चक्रव्यूह: राम मंदिर के करोड़ों के दान का वो ‘सीक्रेट’ रिमोट कंट्रोल, जिसके पीछे छिपे हैं कई अनसुने चेहरे!

अयोध्या राम मंदिर में दान प्रबंधन को लेकर SIT की जांच में भारी सुरक्षा खामियां मिली हैं। परिसर के 40 दानपात्रों में डबल लॉक सिस्टम गायब मिला और चाबियों के नियंत्रण पर भी सवाल उठे हैं। कुछ अनधिकृत बाहरी लोगों द्वारा करोड़ों के वित्तीय फैसले लेने की बात सामने आई है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 22 June 2026, 10:40 AM IST
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Ayodhya: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों रुपये के दान और उसके वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने पूरे तंत्र को हिलाकर रख दिया है। श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के इस केंद्र में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर जो दावे किए जा रहे थे, वे जांच के बाद सवालों के घेरे में हैं। विशेष जांच टीम (SIT) की पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि मंदिर के खजाने और दान राशि के प्रबंधन का असली 'कंट्रोल' नियमों के मुताबिक नहीं, बल्कि किसी और ही तरीके से चलाया जा रहा था।

दानपात्रों का सिंगल लॉक और 'गायब' चाबियों का खेल

सुरक्षा मानकों के अनुसार, मंदिर परिसर में स्थापित करीब 40 दानपात्रों की सुरक्षा बेहद कड़क होनी चाहिए थी। लेकिन जब जांच टीम ने इनका भौतिक निरीक्षण किया, तो होश उड़ाने वाले तथ्य सामने आए। कई दानपात्रों में अनिवार्य 'डबल लॉक सिस्टम' (दोहरा ताला) गायब था और वे केवल एक साधारण ताले के भरोसे छोड़े गए थे। इससे भी गंभीर बात यह है कि इन दानपात्रों को खोलने वाली चाबियों के रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई। चाबियों को उनके निर्धारित सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय, उनका नियंत्रण कुछ चुनिंदा हाथों में था, जो सुरक्षा प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।

बिना पद वाले 'अदृश्य' चेहरों का दखल

जांच में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सस्पेंस यह सामने आया है कि करोड़ों रुपये के वित्तीय फैसलों, मंदिर की व्यवस्थाओं और आवश्यक खरीद-फरोख्त की प्रक्रियाओं में कुछ ऐसे लोगों का दखल बहुत ज्यादा था, जो ट्रस्ट के औपचारिक या आधिकारिक सदस्य भी नहीं थे। आखिर ये 'बाहरी' लोग किसके इशारे पर इतने बड़े वित्तीय साम्राज्य की निगरानी कर रहे थे और काउंटिंग हॉल से लेकर बैंक तक धन पहुंचाने की कड़ियों को प्रभावित कर रहे थे? इसी रहस्य से पर्दा उठाने के लिए जांच टीम वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों का सहारा ले रही है।

जवाबदेही पर सन्नाटा, श्रद्धालु हैरान

इस लापरवाही और हेराफेरी के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही को लेकर खड़ा हो गया है। जब देश का आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई का अंश रामलला के चरणों में सौंपता है, तो उसकी पाई-पाई का हिसाब रखने में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? हालांकि जांच टीम अभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, लेकिन इस अव्यवस्था ने व्यवस्थापकों की नीयत और कार्यप्रणाली दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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 'डिजिटल ऑडिट' और 'बारकोड ट्रैकिंग' की नई तैयारी

इस बड़ी सुरक्षा चूक और वित्तीय गड़बड़ी के उजागर होने के बाद, अब पूरे दान प्रबंधन ढांचे को बदलने की कवायद शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में किसी भी तरह की हेराफेरी को रोकने के लिए अब सभी 40 दानपात्रों को 'स्मार्ट डिजिटल बायोमेट्रिक लॉक्स' से लैस करने का खाका तैयार किया जा रहा है। इसके तहत दानपात्र तभी खुलेंगे जब दो अधिकृत अधिकारियों के फिंगरप्रिंट और ओटीपी एक साथ मैच करेंगे। साथ ही, दान राशि के बैग्स पर 'बारकोड ट्रैकिंग' लगाई जाएगी ताकि काउंटिंग हॉल तक जाने वाले हर एक रुपये की लाइव मॉनिटरिंग हो सके।

Location :  Ayodhya

Published :  22 June 2026, 10:40 AM IST

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