राम मंदिर की 200 किलो चांदी की ईंटें आखिर कहां गईं? 5 साल बाद भी रसीद नहीं, दान पर उठे बड़े सवाल

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए वर्ष 2021 में दान की गई 200 किलो चांदी की ईंटों को लेकर नया विवाद सामने आया है। दानदाताओं का दावा है कि पांच साल बाद भी उन्हें कोई रसीद नहीं मिली। मामले ने तब और तूल पकड़ा जब मंदिर में प्राप्त दान की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 22 June 2026, 12:20 PM IST
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Ayodhya: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच सिंधी समाज की ओर से एक बड़ा आरोप सामने आया है। समाज का दावा है कि वर्ष 2021 में मंदिर निर्माण के लिए 200 किलो चांदी की ईंटें दान की गई थीं, लेकिन आज तक इसकी कोई आधिकारिक रसीद जारी नहीं की गई। इस मुद्दे ने दान और चढ़ावे की पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

पांच साल बाद भी नहीं मिली रसीद

विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी ने आरोप लगाया है कि 26 जनवरी 2021 को 200 किलो चांदी की ईंटें मंदिर निर्माण के लिए सौंपी गई थीं। उस समय उन्हें आश्वासन दिया गया था कि चांदी की शुद्धता की जांच के बाद विस्तृत रसीद जारी की जाएगी। हालांकि, वर्षों बीत जाने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की आधिकारिक रसीद या जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

12 देशों से पहुंचे थे प्रतिनिधि

डॉ. मनवानी के अनुसार, जब चांदी की ईंटें सौंपी गई थीं तब 12 देशों से सिंधी समाज के प्रतिनिधि भी अयोध्या पहुंचे थे। इन ईंटों पर भगवान झूलेलाल की तस्वीर अंकित थी। कार्यक्रम को समाज के लिए एक ऐतिहासिक और धार्मिक अवसर के रूप में देखा गया था।

दान और चढ़ावे की जांच में जुटी एसआईटी

दान और चढ़ावे को लेकर उठे सवालों के बीच राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जांच के दौरान रिकॉर्ड प्रबंधन और दस्तावेजी प्रक्रियाओं में संभावित लापरवाही की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों और शिकायतों की भी पड़ताल कर रही हैं।

मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी

डॉ. राजू मनवानी ने कहा है कि यदि जल्द स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो वह इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि दानदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिया गया योगदान किस स्थिति में है और उसका रिकॉर्ड क्या है।

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पारदर्शिता पर बढ़ा दबाव

मामले ने धार्मिक संस्थाओं में प्राप्त होने वाले बड़े दान के रिकॉर्ड, ऑडिट और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े दानों के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, सार्वजनिक रजिस्टर और समयबद्ध रसीद व्यवस्था जैसी प्रक्रियाएं विवादों को कम कर सकती हैं।

बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट्स में दान की वस्तुओं का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग समय-समय पर उठती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं और नकद दान का डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए तो पारदर्शिता बढ़ सकती है। भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए दानदाताओं को ऑनलाइन ट्रैकिंग नंबर और डिजिटल रसीद उपलब्ध कराई जा सकती है।  धार्मिक संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन पर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की व्यवस्था भी विश्वास बढ़ाने में मदद कर सकती है।

 

Location :  Ayodhya

Published :  22 June 2026, 12:20 PM IST

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