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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) मुख्यालय उस वक्त भावुक क्षणों का गवाह बना, जब बांदा जिले से आई एक बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय की गुहार लगाई।
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) मुख्यालय उस वक्त भावुक क्षणों का गवाह बना, जब बांदा जिले से आई एक बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित महिला रन्नो देवी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर आरोप लगाया कि उनके बेटे की निर्मम हत्या हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है।
बांदा निवासी रन्नो देवी का कहना है कि उनके बेटे की हत्या बेहद सुनियोजित तरीके से की गई थी। घटना के बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि प्रभावशाली आरोपियों के दबाव में पुलिस मामले को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। न्याय की आखिरी उम्मीद लेकर बुजुर्ग महिला लखनऊ पहुंचीं और सपा मुख्यालय में अखिलेश यादव से मिलने की कोशिश की।
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सपा मुख्यालय में अखिलेश यादव से मिलने के दौरान भारी भीड़ के बीच अव्यवस्था की स्थिति बन गई। इसी दौरान धक्कामुक्की में रन्नो देवी का मोबाइल फोन टूट गया। पीड़ित महिला ने इस घटना को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई और कहा कि उनका फोन ही उनके बेटे की हत्या से जुड़े अहम सबूतों और संपर्क का जरिया था।
महिला की शिकायत और पूरी घटना की जानकारी मिलने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत नया मोबाइल फोन देने का वायदा किया। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि बेटे की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती से साथ खड़ी रहेगी। अखिलेश यादव ने कहा कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए कानूनी और राजनीतिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
पीड़ित महिला रन्नो देवी बांदा की रहने वाली है। पीड़िता का कहना है कि “मेरे बेटे को बेरहमी से मार दिया गया, लेकिन आज तक कोई इंसाफ नहीं मिला। हत्यारे खुले घूम रहे हैं। अखिलेश यादव जी से मिलकर मुझे उम्मीद जगी है कि अब शायद मेरे बेटे को न्याय मिलेगा।”
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इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि गरीब और कमजोर परिवारों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जबकि प्रभावशाली अपराधी कानून से बेखौफ हैं।