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प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कुल 220 ऑनलाइन आवेदन आए थे। इनमें जांच के बाद 149 जोड़ों को पात्र पाया गया और 25 अक्टूबर को उनका सामूहिक विवाह कराया गया। वहीं, कुछ आवेदनों को पात्रता और दस्तावेजों की कमी के चलते निरस्त कर दिया गया। इन्हीं निरस्त आवेदनों की पड़ताल के दौरान यह मामला अधिकारियों के सामने आया।
जांच के दौरान जब महिला को बुलाकर उससे कानूनी तलाक के दस्तावेज मांगे गए, तो उसने अधिकारियों से कहा कि साथ आया व्यक्ति उसका पति है, लेकिन वह उसे पसंद नहीं करती। महिला ने देवर से शादी करने की इच्छा जताई। हैरानी की बात यह रही कि महिला के साथ आए पति ने भी उसकी बात का समर्थन किया। पति ने अधिकारियों के सामने कहा कि उसकी पत्नी सच बोल रही है और उसे अपने पति के बजाय उसका छोटा भाई पसंद है। उसके मुताबिक, कुछ दिन पहले पंचायत में पंचों के सामने बैठकर दोनों के अलग होने का फैसला किया गया था।
महिला और उसके पति ने अपने अलगाव के समर्थन में सादे कागज पर लिखा हुआ तलाकनामा पेश किया। हालांकि, आवेदन की जांच कर रहे अधिकारी ने इसे कानूनी तलाक का वैध दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, योजना के तहत दोबारा शादी करने के लिए जरूरी कानूनी शर्तों और दस्तावेजों को पूरा करना अनिवार्य है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी नीलम सिंह चौहान ने बताया कि कानूनी तलाक के दस्तावेज नहीं लगाए जाने के कारण चार-पांच आवेदन निरस्त किए गए थे। इनमें एक मामला ऐसा भी था, जिसमें महिला कानूनी रूप से तलाक लिए बिना अपने देवर से शादी करना चाहती थी। इस मामले ने सामूहिक विवाह योजना के आवेदनों की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की अहमियत को फिर सामने ला दिया है। सरकारी योजना के तहत विवाह के लिए सिर्फ आपसी सहमति या पंचायत का फैसला पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संबंधित कानूनी शर्तों को पूरा करना भी जरूरी है।
Location : Baghpat
Published : 30 October 2026, 6:59 PM IST