शिक्षा की नई उड़ान बलरामपुर के कॉन्वेंट स्कूलों में अब गूंजेगी गरीब के लाल की आवाज
बलरामपुर जिले के लिए एक गौरवपूर्ण खबर! शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत इस साल 655 बच्चों को जिले के नामचीन निजी स्कूलों में सीटें आवंटित की गई हैं। इनमें से 543 बच्चों ने अपने सपनों के स्कूल में दाखिला ले लिया है।
Balrampur: जिले के शिक्षा जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब धन का अभाव किसी मेधावी के सपनों में बाधा नहीं बनेगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम ने जिले के उन अभावग्रस्त परिवारों के लिए खुशियों की नई राह खोल दी है, जो अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में पढ़ाने की केवल कल्पना ही कर पाते थे।
बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए प्रतिबद्ध
इस वर्ष प्रशासन की सक्रियता से जिले के विभिन्न नामचीन कॉन्वेंट स्कूलों के द्वार 655 बच्चों के लिए खुल गए हैं, जिनमें से अधिकांश ने अपनी कक्षाओं में कदम भी रख दिए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला के अनुसार, लॉटरी के माध्यम से चयनित इन बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अब तक 543 बच्चे नामांकित हो चुके हैं और बाकी के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
बेहतर भविष्य
खास बात यह है कि सरकार केवल दाखिला ही नहीं दिला रही, बल्कि बच्चों की बुनियादी जरूरतों का ख्याल रखते हुए ड्रेस और किताबों के लिए पांच हजार रुपये की विशेष सहायता राशि भी प्रदान कर रही है। इससे उन अभिभावकों के चेहरों पर चमक लौट आई है, जो अब तक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य को लेकर चिंतित थे।सामाजिक
समानता की दिशा में एक बड़ा कदम
प्रशासन ने स्कूलों को सख्त हिदायत दी है कि इन बच्चों के प्रवेश में किसी भी स्तर पर आनाकानी या भेदभाव स्वीकार्य नहीं होगा। खंड शिक्षा अधिकारियों को खुद इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। जिले के प्रबुद्ध वर्ग और अभिभावकों ने इस पहल को सामाजिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
शिक्षाविदों का मानना है कि जब एक ही छत के नीचे अलग-अलग आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चे शिक्षा ग्रहण करेंगे, तो इससे न केवल उनका बौद्धिक विकास होगा, बल्कि समाज में व्याप्त खाई भी कम होगी।