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8वां वेतन आयोग (Img: AI)
Lucknow: केंद्र सरकार समय-समय पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन एवं भत्तों की समीक्षा के लिए वेतन आयोग का गठन करती है। अब 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग का उद्देश्य मौजूदा वेतन संरचना की समीक्षा कर कर्मचारियों के लिए नई सिफारिशें तैयार करना है। इससे पहले 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें वर्ष 2016 में लागू हुई थीं। इसके बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को नए वेतनमान और भत्तों का लाभ मिला था। अब सभी की नजर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है।
8वें केंद्रीय वेतन आयोग के प्रतिनिधिमंडल के दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे के दूसरे दिन विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने अपनी मांगें और सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, ऑर्डनेंस फैक्ट्री हॉस्पिटल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश IAS एसोसिएशन और रिटायर्ड आईएएस एसोसिएशन सहित कई संगठनों ने भाग लिया।
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार के सामने वेतन बढ़ोतरी का बड़ा प्रस्ताव रखा है। संगठनों ने न्यूनतम और अधिकतम वेतन में भारी वृद्धि की मांग की है। उनका कहना है कि महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव जरूरी है। कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन को 60 हजार रुपये से 70,700 रुपये तक करने की मांग की है। वहीं, अधिकतम वेतन को बढ़ाकर 8.33 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा फिटमेंट फैक्टर को 3.333 से 3.93 तक तय करने की मांग की गई है।
संगठनों ने वार्षिक वेतन वृद्धि को लेकर भी सुझाव दिया है। अभी सालाना वेतन वृद्धि 3 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 5 से 6 प्रतिशत करने की मांग रखी गई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे सरकारी कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी और उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी। अब सभी की नजरें सरकार और 8वें वेतन आयोग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए वेतन संरचना में व्यापक सुधार की जरूरत है।
बैठक में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था कर्मचारियों को सेवा के बाद अधिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अलावा 70 वर्ष की आयु के बाद चरणबद्ध पेंशन वृद्धि का भी प्रस्ताव आयोग के समक्ष रखा गया।
विभिन्न संगठनों ने ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर मिलने वाली एक्स-ग्रेशिया राशि को 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करने की मांग की। साथ ही ग्रेच्युटी की सीमा 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपये करने, 600 दिन तक लीव एनकैशमेंट देने और कर्मचारियों के परिवारों को बेहतर सुरक्षा सुविधाएं देने का सुझाव भी रखा गया।
कर्मचारी संगठनों ने मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता, शिक्षा भत्ता, चिकित्सा भत्ता और जोखिम भत्ते में व्यापक संशोधन की मांग की। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स ने मकान किराया भत्ता 35 से 45 प्रतिशत तक करने और परिवहन भत्ता तीन गुना बढ़ाने का सुझाव दिया।
डिप्लोमा इंजीनियरों के संगठन ने जूनियर इंजीनियरों का न्यूनतम वेतन 1.39 लाख रुपये करने और विभिन्न वेतन स्तरों के विलय की मांग रखी। वहीं उत्तर प्रदेश IAS एसोसिएशन और रिटायर्ड IAS एसोसिएशन ने वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन, चिकित्सा सुविधाओं, हाउस बिल्डिंग एडवांस, ग्रेच्युटी और पेंशन कम्यूटेशन में सुधार की आवश्यकता बताई।
कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के अनुसार आयोग ने कई प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। आयोग विभिन्न राज्यों और कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। रिपोर्ट में वेतन, भत्तों, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े बदलावों की सिफारिशें शामिल होंगी। इसके बाद केंद्र सरकार इन सिफारिशों पर निर्णय लेगी। फिलहाल सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग की आगामी सिफारिशों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
Location : Lucknow
Published : 24 June 2026, 5:14 PM IST