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ममता बनर्जी ने खुलकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी बातें रखी और CJI ने उनकी बातों को ध्यान से सुना भी। अब आज की सुनवाई के अंत में CJI ने कहा कि अब अगली सुनवाई सोमवार (9 फरवरी) को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई
New Delhi: बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को जवाब देना होगा। यह बात CJI सूर्यकांत ने SIR मामले में सुनवाई के दौरान बोली हैं। दरअसल, ममता बनर्जी ने SIR केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल की थी, उस पर आज सुनवाई थी। ममता बनर्जी ने खुलकर सुप्रीम कोर्ट में अपनी बातें रखी और CJI ने उनकी बातों को ध्यान से सुना भी। अब आज की सुनवाई के अंत में CJI ने कहा कि अब अगली सुनवाई सोमवार (9 फरवरी) को होगी और इसके अलावा बंगाल की सीएम ममता की याचिका का चुनाव आयोग को जवाब भी देना होगा।
भारत के इतिहास में पहली बार
आपको बता दें कि भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कोई मुख्यमंत्री वादी के रूप में सीधे सुप्रीम कोर्ट में मौजूद हुईं। सीएम ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट में पेश होते वक्त सफेद साड़ी और काले शॉल में देखा गया।
सुप्रीम कोर्ट में SIR पर सुनवाई के बीच सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सूरज कुमार झा के साथ डाइनामाइट न्यूज़ की खास बातचीत, कोर्ट रूम में सुनवाई पर देखिये क्या बोले अधिवक्ता #MamataBanerjee #WestBengal #SIR #SupremeCourt pic.twitter.com/Q0d7YN0AVB
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) February 4, 2026
ममता बनर्जी ने मांगे 5 मिनट, CJI सूर्यकांत ने दिए 15 मिनट
सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने CJI सूर्यकांत से कहा, "मैं बहुत सामान्य परिवार से आती हूं। हमें कहीं भी इंसाफ नहीं मिल रहा है। मुझे अपनी बात रखनी है, आप मुझे 5 मिनट दीजिए।" इस पर CJI ने कहा, "हम आपको 15 मिनट देंगे, कोई समस्या नहीं।"
बंगाल की सीएम ने कहा- ये सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं है
ममता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, "कई BLO की जान चली गई है। ये सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं। हम चाहते हैं कि कोई भी योग्य वोटर लिस्ट से बाहर ना हो। बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। शादी के बाद सरनेम लगाने पर भी वोटर लिस्ट से नाम काट दिए गए। SIR सिर्फ नाम मिटाने के लिए है।"
CJI ने ममता बनर्जी को क्या जवाब दिया?
इस पर CJI ने रिप्लाई दिया, "हम भी चाहते हैं कि कोई योग्य लिस्ट से से बाहर ना हो।"
सीएम बोलीं- SIR सिर्फ नाम मिटाने के लिए
बंगाल की सीएम ने CJI को बताया, "SIR सिर्फ नाम मिटाने के लिए है। बंगाल में आधार को दस्तावेज नहीं मान रहे। असम में SIR क्यों नहीं हो रहा है।