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चेन्नई/तिरुवनंतपुरम: कांग्रेस हमेशा से भाजपा की यह कहकर आलोचना करती है कि भाजपा उत्तर भारत की पार्टी है। कर्नाटक को छोड़ दक्षिण भारत के किसी भी राज्य में भाजपा का मजबूत जनाधार नहीं है।
इस मिथक को तोड़ने के लिए भाजपा नेताओं ने 2024 के लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु और केरल में खूब मेहनत की। तमिलनाडु की 39 सीटों पर 19 अप्रैल और केरल की 20 सीटों पर 26 अप्रैल को वोटिंग हो चुकी है।
2019 के चुनावों की बात करें तो इन दोनों राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक था।
यही कारण है कि इस बार भाजपा के केन्द्रीय नेताओं ने इन दोनों राज्यों में काफी प्रचार किया लेकिन क्या यह मेहनत 4 जून को सीटों में तब्दील हो पायेगी? इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाताओं के मुताबिक भाजपा नेताओं ने काफी मेहनत की लेकिन वे जमीनी सच्चाई पर पकड़ नहीं बना पाये। इसकी दो वजहें सामने आ रही हैं।
मतदान के बाद डाइनामाइट न्यूज़ ने स्थानीय हकीकत जानने का प्रयास किया। भाजपा के केन्द्रीय संगठन के एक मजबूत पदाधिकारी से तमिलनाडु के राज्य इकाई ने उत्तर भारत के एक जनाधार वाले नेता का कार्यक्रम लगाने की कई बार मांग की लेकिन उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया।
इसी तरह राज्य भाजपा के प्रमुख नेता पहले से तैयारी कर जिन सीटों से चुनाव लड़ना चाहते थे, उन सीटों की बजाय दूसरी सीटों पर उन्हें चुनाव लड़ाया गया। कहा जा रहा है कि यदि भाजपा इन दोनों राज्यों में अपेक्षा के अनुरुप सीट नहीं जीतती है तो इसके पीछे दो बड़ी वजह होगी, केन्द्रीय व राज्य इकाईयों के बड़े नेताओं के बीच सामंजस्य का अभाव और अहंकार।
Published : 30 April 2024, 12:14 PM IST
Topics : bjp kerala Lok Sabha Election TamilNadu केरल तमिलनाडु नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव