जान लीजिये नागचंद्रेश्वर मंदिर का रहस्य, नाग पंचमी से है खास कनेक्शन

उज्जैन में एक मंदिर है नागचंद्रेश्वर। मंदिर के कपाट नाग पंचमी पर 24 घंटे के लिये ही खुलते हैं। मंदिर में स्थापित नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा विश्व में आपको कहीं भी देखने को नहीं मिलेगी। भक्तों का इस मंदिर से बेहद खास लगाव है। मंदिर के कपाट खुलते ही भक्त यहां दर्शन के लिये दौड़े चले आते हैं। चलिये जान लेते हैं डाइनामाइट न्यूज के इस खास लेख में नागचंद्रेश्वर मंदिर का रहस्य।

Updated : 9 August 2024, 10:06 AM IST
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उज्जैनः हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा की विधि कोई नई नहीं हैं। मंदिरों में विशेष अवसर पर विशेष तरीके से भगवान की पूजा की जाती है। चलिये आज हम आपको ले चलते हैं उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर। इस मंदिर के पट साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन खुलते हैं। इस दिन लाखों की संख्या में भक्त नागचंद्रेश्वर मंदि में दर्शन के लिये पहुंचते हैं। 

दुल्हन की तरह सजा नागचंद्रेश्वर मंदिर 
भक्तों को हर साल नाग पंचमी के दिन नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar temple) के पट खुलने का इंतजार रहता है। बीती गुरुवार की रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुल गये हैं। मंदिर का पट शुक्रवार की रात 12 बजे खुले रहेंगे। लाखों की संख्या में भक्त मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर को आज दुल्हन की तरह सजा दिया गया है। 

आपने पाठकों को हम बता दें कि आज के दिन विशेष तरीके से नागों की पूजा करने की परंपरा है। यहीं कारण है कि इस उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में महाकाल मंदिर मध्य भाग में ओंकारेश्वर मंदिर व शीर्ष पर श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर प्रतिष्ठापित है।

शिव-पार्वती फन फैलाये नाग पर रहते हैं विराजमान
ऐसा कहा जाता है कि नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की है। प्रतिमा की विशेषता यह है कि इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर भगवान शिव और पार्वती विराजमान हैं। इस मंदिर में भगवान शिव की पूरी दुनिया में यह एक अनोखी प्रतिमा है, जिसमें नाग शैया पर भगवान भोले विराजमान हैं। 

नाग पंचमी पर होती है त्रिकाल पूजन
मंदिर की परंपरा यह है कि रात 12 बजे मंदिर खुलने के बाद सबसे पहले पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से महंत विनीत गिरी महाराज नागचंद्रेश्वर का त्रिकाल पूजन करेंगे। यह पूजा तकरीबन 1 घंटे तक चलती है। इस दौरान आरती होती है और भोग लगता है। इसके बाद रात 1 बजे से आम लोग मंदिर में दर्शन करने लगते हैं। 

अद्भुत प्रतिमा
नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा में शिव-पार्वती के अलावा गणेश जी की मूर्ति, उमा के दांयी ओर कार्तिकेय हैं। मूर्ति के ऊपर की तरफ सूर्य-चंद्रमा हैं। 

नेपाल से लाई गई थी दुर्लभ प्रतिमा
नागचंद्रेश्वर भगवान की प्रतिमा में गले व भुजाओं में भुजंग लिपटे हैं। कहा जाता है कि यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। मान्यता तो यह भी है कि उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है।

क्यों खुलते हैं साल में एक बार पट
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सांपों के राजा तक्षक  (Raja Takshak) ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। इससे खुश होकर भगवान ने तक्षक नाग को अमर होने का वरदान दिया था। इस आशीर्वाद के बाद से ही नागराज तक्षक बाबा महाकाल की शरण में वास करते हैं। अमरत्व के साथ ही नागराज की यह अभिलाषा थी कि उनके एकांत में कोई बाधा नहीं हो। यही कारण यह मंदिर पूरे साल बंद रहता है। बस नाग पंचमी के दिन ही नागचंद्रेश्वर महादेव की पूजा का विधान है।

कब बना यह मंदिर?
इस मंदिर को लेकर यह माना जाता है कि 1050 ईस्वी के आस-पास परमार राजा भोज (Parmar Raja Bhoj) ने इसका निर्माण करवाया था। इसके बाद 1973 सिंधिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर का जीर्णोध्दार करवाया था।

 

Published :  9 August 2024, 10:06 AM IST

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