Sawan Kanwar Yatra 2024: जानिये श्रावण मास में कांवड़ यात्रा और सोमवार का खास महत्व, इस बार बन रहे अद्भुत संयोग

सावन के माह का खास महत्व है। इस साल सावन 22 जुलाई को शुरू हो रहा है, जो 19 अगस्त को समाप्त होगा। खास बात ये है कि 19 अगस्त को भी सोमवार है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

Updated : 21 July 2024, 11:55 AM IST
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नई दिल्ली: कल यानी 22 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है। भगवान शिव को सावन का महीना बेहद प्रिय है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी पार्वती ने अपने पति के रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए पूरे सावन महीने में कठोरतम तक किया था।

इस साल सावन 22 जुलाई को शुरू हो रहा है, जो 19 अगस्त को समाप्त होगा। खास बात ये है कि 19 अगस्त को भी सोमवार है।

सावन में कांवड़ यात्रा का महत्व

डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार श्रावण मास में कांवड़ के माध्यम से जल-अर्पण करने से वैभव और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

वेद-पुराणों सहित भगवान भोलेनाथ में भरोसा रखने वालों को विश्वास है कि कांवड़ यात्रा में जहां-जहां से जल भरा जाता है, वह गंगाजी की ही धारा होती है।

सावन शिवरात्रि का व्रत

सावन शिवरात्रि व्रत अगस्त 2, 2024, शुक्रवार को किया जाएगा। सावन शिवरात्रि 2 अगस्त को है। इस दिन आप किसी भी समय कावड़ जल चढ़ा सकते हैं। वैसे सावन शिवरात्रि का सबसे शुभ मुहूर्त रात 12:06 से 12:49 बजे तक है।

कांवड़ का अर्थ

कांवड़ अर्थात् ऐसा व्यक्ति जो अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनेक प्रकार की कठिन से कठिन बाधाओं को पार कर जाए। ऐसा व्यक्ति कोई तपस्वी ही हो सकता है। इस शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है ।

"श्रावण मास में कांवड़ का संबंध"

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शंकर ने जो विषपान किया था, वह घटना भी सावन महीने में ही हुई थी। तभी से यह क्रम अनवरत चलता आ रहा है।

कैसे करें व्रत 
सावन मास में सोमवार के दिन भगवान शिव का व्रत करना चाहिए और वर्त के बाद भगवान श्री गणेश जी, भगवान शिव जी, माता पार्वती व नंदी देवी की पूजा करनी चाहिए, सावन में सोमवार का व्रत करने वाले को दिन में एक बार भोजन करना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त होने के वाद गंगाजल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़के साथ ही घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पूजन सामग्री

पूजन सामग्री में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, मोली, वस्त्र,चंदन, रोरी चावल, फूल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, कमल, गठा, प्रसाद, पान, सुपारी लौंग, इलाइची व दक्षिणा चढ़ाया जाता है। सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से प्रारंभ कर तीसरे पहर तक किया जाता है। शिव पूजा के बाद भगवान शिव की पूजा और शिव चालिसा का पाठ आवश्य करें।

Published : 
  • 21 July 2024, 11:55 AM IST

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