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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) राजेश साहनी की मौत के मामले ने पिछले पांच दिनों से पूरे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रखा है। पांच महीने पहले तक यूपी के पुलिस महानिदेशक रहे 1980 बैच के सेवानिवृत्त आईपीएस सुलखान सिंह से इस बेहद चर्चित मामले पर डाइनामाइट न्यूज़ से विशेष बातचीत की।
एटीएस के अफसरों को देना चाहिये जवाब
सुलखान सिंह ने कहा कि राजेश साहनी जैसे होनहार अफसर की आत्महत्या पूरे पुलिस विभाग के लिए काफी चिंताजनक और दुख पहुंचाने वाली घटना है। एटीएस के अफसरों को इसका जवाब देना चाहिये। यह कोई छोटा-मोटा मामला नही है। पुलिस फोर्स अनुशासन का विभाग है। यह इतना रिस्की विभाग है कि यदि आपस में सीनियर औऱ जूनियर के बीच विश्वास नही रहेगा तो काम ही नही हो सकता। अंदरुनी असंतोष रहेगा तो काम आगे ही नही बढ़ेगा। मनोबल ऊंचा रहे फोर्स का इसलिए ऐसी घटनाएं घटनी ही नहीं चाहिये।
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सीबीआई जांच एक अच्छा कदम
सीबीआई जांच से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा कदम है, इससे सच्चाई सामने आयेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जांच विभाग में भी निष्पक्षता से करायी जा सकती थी लेकिन अब जब सीबीआई जांच हो रही है तो फिर यह बिल्कुल ठीक है।
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एटीएस आईजी को हटाये जाने से बनी रहेगी निष्पक्षता
क्या सीबीआई जांच के दौरान नैतिकता के आधार पर एटीएस के आईजी असीम अरुण को उनके वर्तमान पद से हटा देना चाहिये? इसके जवाब में पूर्व डीजीपी ने कहा कि यह तो विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट को देखना है कि वे क्या करते हैं लेकिन मेरी राय तो ये है कि यदि हटाया जाता है तो यह अच्छा रहेगा और इससे निष्पक्षता बनी रहेगी।
दोनों अफसरों के बॉस रहे हैं सुलखान सिंह
गौरतलब है कि सुलखान सिंह की गिनती देश के बेहद ईमानदार आईपीएस अफसरों में होती है। इस समय आरोपों की जद में आये एटीएस के आईजी असीम अरुण और दिवंगत राजेश साहनी दोनों ने ही सुलखान सिंह के साथ पांच महीने पहले तक काफी नजदीक से काम किया है।
Published : 2 June 2018, 6:50 PM IST
Topics : असीम अरुण आत्महत्या एटीएस डीजीपी मौत यूपी यूपी पुलिस राजेश साहनी सुलखान सिंह
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