क्या आत्महत्या के लिए यूपी एटीएस के एएसपी राजेश साहनी को किसी ने किया मजबूर?

डीएन संवाददाता

यूपी एटीएस के एएसपी राजेश साहनी की मौत के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिरकार राजेश ने क्यों खुद को गोली से उड़ा दिया? क्या इसके पीछे विभागीय कलह है या फिर कोई और वजह.. डाइनामाइट न्यूज़ की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट..

दिवंगत राजेश साहनी (फाइल फोटो)
दिवंगत राजेश साहनी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: मंगलवार की भरी दुपहरी में यूपी से आयी एक बड़ी खबर ने दिल्ली तक सरगर्मी पैदा कर दी। खबर थी कि उत्तर प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वायड (यूपी एटीएस) के जांबाज और दिलेर किस्म के 1992 बैच के वरिष्ठ पीपीएस अधिकारी राजेश साहनी ने एटीएस के अपने दफ्तर में अपनी सर्विस पिस्टल से खुद को गोली मार कर मौत को गले लगा लिया है।

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 किसकी आंखों की किरकिरी थे साहनी?

मूल रुप से पटना के रहने वाले 48 वर्षीय राजेश के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी है। कुछ समय बाद इनका प्रमोशन आईपीएस के लिए होना था। डाइनामाइट न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक परिवारिक तौर पर इनका जीवन हंसी-खुशी चल रहा था इसी बीच विभाग में किसी की नजर इन पर लग गयी। अपने नौकरी के कार्यकाल में एनआईए से लेकर तमाम चुनौतीपूर्ण जगहों पर काम कर यूपी पुलिस का नाम रोशन करने वाले साहनी की आम शोहरत एक बेहद ईमानदार और कर्मठ अफसर के रुप में होती है। 

साहित्यप्रेमी, जिंदा दिल और खुशमिजाज किस्म के अफसर राजेश पिछले लगभग 4 साल से यूपी एटीएस में तैनात थे और कहा तो यहां तक जाता है कि एटीएस की नस-नस से ये वाकिफ थे। 

 

एटीएस के भरोसेमंद सूत्रों ने डाइनामाइट न्यूज़ को बताया कि साहनी 26 मई से करीब दो सप्ताह की EL यानि अर्जित अवकाश पर थे। इन्हें अपनी इकलौती बेटी के एडमिशन के सिलसिले में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई जाना था। इसी बीच उन्हें जबरन बीच छुट्टी से वापस बुला लिया गया और कल यानि 28 मई को पूरे दिन एटीएस के दफ्तर में उनसे काम कराया गया। फिर मंगलवार को घटना के दिन भी उन्हें आफिस बुलाया गया।

 

 

क्या हुआ था कमरे के भीतर?
खबर के मुताबिक घटना के ठीक पहले राजेश अपने बॉस यानि एटीएस के आईजी असीम अरुण (IPS, UP:1994) के कमरे में गये यहां से निकलकर वे अपने कमरे में पहुंचे और कमरे के भीतर सर्विस पिस्टल से खुद को गोली मार ली। 

एटीएस के कर्मचारियों में अंदर ही अंदर काना-फूसी और चर्चाओं का जबरदस्त दौर चल रहा है लेकिन अनुशासन की वजह से कोई अभी कुछ खुलकर बताने को तैयार नही है।

अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि आखिरकार राजेश ने आत्महत्या क्यों की? क्या उन पर कोई विभागीय दबाव था? क्या उन पर कोई गलत काम करने का दबाव डाल रहा था? 

खरीददारी विवाद है आत्महत्या का कारण?
डाइनामाइट न्यूज़ को मिले अहम सुरागों में से एक कड़ी खरीददारी के विवाद की तरफ मुड़ती है। आने वाले दिनों में एटीएस में करोड़ों रुपये के सामान की खरीददारी होनी है.. इसे लेकर पिछले दिनों राजेश को बेइज्जत भी किया गया था। क्या उनकी किसी खरीददारी की प्रकिया में सहमति आवश्यक थी जिसमें वे अपनी आपत्ति जता रहे थे? क्या वे ऐसी किसी कमेटी के सदस्य थे? क्या घटना से ठीक पहले उनका अपने आईजी से कोई विवाद हुआ था जिससे आहत होकर उन्होंने खुद को गोली मार ली? गोली की आवाज के बाद सबसे पहले कमरे में कौन पहुंचा? क्या कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ? क्या कमरे में सबसे पहले पहुंचे अफसर ने सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ की? घटना के बाद कमरे के मुआयने के बाद दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया गया, क्यों नही जैसे ही घटना घटी उसके बाद तत्काल राजेश को नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया? और बचाने की कोई कोशिश की गयी?

पारिवारिक एंगल देने में जुटी पुलिस
पुलिस पूरे मामले को पारिवारिक एंगल देने में जुट गयी है। घटना के बाद बेसुध पत्नी के जवाब से काफी हद तक केस को सुलझाने में मदद मिलेगी लेकिन मौके पर पहुंची पत्नी को मीडिया तक से बाद करने की इजाजत पुलिस वालों ने नही दी। 

किस आधार पर डीआईजी ने कहा स्वेच्छा से लौटे राजेश
लखनऊ में मीडिया को ब्रीफ करने आये डीआईजी प्रवीण तिवारी यूं तो हर बात का टाल-मटोलकर जवाब देते रहे कि जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है लेकिन इस बात की घोषणा बिना किसी जांच के स्वेच्छा से कर दी कि राजेश अपनी छुट्टी रद्द कर स्वयं एटीएस दफ्तर पहुंचे थे.. क्या राजेश ने 28 मई को छुट्टी से वापस आने के बाद लिखित में दिया था कि वे अपनी छुट्टी स्वेच्छा से रद्द करके आय़े है? 

 

फेसबुक पर कुछ यूं उकेरा दिवंगत राजेश ने अपना दर्द

 

फेसबुक पर कुछ यूं बयां किया अपना दर्द
राजेश का फेसबुक भी इस बात की तस्दीक कर रहा है कि आफिस में कोई है जो उन्हें लंबे समय से सता रहा था। बीते 23 सितंबर को उन्होंने फेसबुक पर लिखा "ताकि कोई दिन न बिगाड़े".. ' हमारे साथ अक्सर होता है। हम मजे में काम कर रहे होते हैं। अचानक कोई आता है। हमें कुछ कड़वा सा कह जाता है और हमारा पूरा मूड कसैला हो जाता है'.. राजेश की यह लाइनें आफिस की तानाशाही बयां करने के लिए काफी है। 

एटीएस के स्टाफ में भयंकर आक्रोश
एटीएस के अंदरुनी स्टाफ में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि तानाशाही भरे आदेशों को न मानने पर उनके साथ गाली-गलौज तक की जाती है और अमर्यादित व्यवहार करने के साथ-साथ प्रमोशन में भी अड़ंगा डालने की धमकी दी जाती थी? 

क्या प्रमोशन में अड़ंगे की दी गयी थी धमकी?
आने वाले दिनों में राजेश का प्रमोशन आईपीएस में होना था.. क्या उन्हें विभागीय खरीददारी में अड़चन डालने की सजा के तौर पर उनके विभागीय चरित्र पंजिका में विपरित टिप्पणी करने की धमकी दी गयी थी? इसका जवाब आने वाले समय में बखूबी मिलेगा।

आंखों में धूल झोंकने की तैयारी
फिलहाल स्थानीय पुलिस की पुरजोर कोशिश है कि मामले में आत्महत्या का मुकदमा दर्ज कर दरोगा स्तर के आईओ से जांच कराकर मामले को पारिवारिक तनाव में आत्महत्या का रुप दे दिया जाय और जिम्मेदारों को सीधे-सीधे आंखों में धूल झोंककर बचा लिया जाय। 

सीबीआई जांच से खुलेगा राज!
हालांकि इस बीच दिवंगत राजेश के कई साथी पुलिस अफसरों का कहना है कि मामले की जांच सीबीआई से करायी जाय तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा। उन्हें स्थानीय पुलिस की जांच पर बिल्कुल भी भरोसा नही है।

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