DN Exclusive: आखिर क्यों.. सबरीमाला मंदिर में 800 सालों से वर्जित था महिलाओं का प्रवेश?

डीएन ब्यूरो

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सबरीमाला मंदिर को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। कोर्ट ने 800 साल पुरानी परंपरा को बदलकर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा दिया है। अब सभी उम्र की महिलाएं इस मंदिर में प्रवेश सकेंगी। आखिर क्यों यहां महिलाओं के प्रवेश पर थी पाबंदी। पढ़िये, डाइनामाइट न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट में

केरल का ऐतिहासाकि सबरीमाला मंदिर (फाइल फोटो)
केरल का ऐतिहासाकि सबरीमाला मंदिर (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में आज शुक्रवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 800 साल पुरानी प्रथा को बदलते हुए फैसला सुनाया कि अब इस मंदिर में सभी उम्र की महिलाएं बिना किसी रोक-टोक के यहां प्रवेश कर पाएंगी।

आखिर क्यों महिलाओं के प्रवेश पर थी रोक

1. सबरीमाला मंदिर को लेकर यह मान्यता जुड़ी है कि मंदिर के अंदर स्थापित अयप्पा स्वामी एक ब्रह्मचारी थे, जिन्होंने कभी शादी नहीं की थी। मान्यता के मुताबिक ब्रह्मचर्य का पालन शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से होना चाहिए। महिलाओं के प्रवेश पर ब्रह्मचर्य और मासिक धर्म के कारण ही मंदिर के अंदर जाने पर रोक लगाई गई थी।     

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सबरीमाला मंदिर

2. मंदिर में मासिक धर्म से गुजर रही महिलाओं समेत सभी 10 से कम और 50 साल के ऊपर की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी।

3. मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यहां सिर्फ मासिक धर्म से गुजर रही महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी, दूसरी महिलाओं पर नहीं।

4. वर्षों से चली आ रही परंपरा के कारण भी महिलाएं मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती थी।    

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सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु (फाइल फोटो)

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5. मंदिर को लेकर एक पौराणिक मान्यता भी जुड़ी हुई कि जिसे लेकर कहा जाता है, भगवान अयप्पा का जन्म राक्षसी को मारने के लिए हुआ था। जिनको शिव और वेषधारी विष्णु का रूप मोहनी का पुत्र माना जाता है। 

6. कहा जाता है कि भगवान अयप्पन ने यहां एक राक्षसी का वध किया था। वह राक्षसी एक खूबसूरत महिला के स्वरूप में प्रकट हुई थी और उसने अयप्पन से शादी का भी प्रस्ताव रखा था। शादी के प्रस्ताव को भगवान अयप्पन ने ठुकरा दिया था। तब से इस मान्यता का सभी लोग पालन करते हुए आ रहे हैं, महिलाओं को मंदिर में जाने से रोका जाता रहे, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिया है। 

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