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पूर्णिया: बिहार में पूर्णिया के साहित्यकार की कहानी सुन कर आप भी कहेंगे प्यार हो तो ऐसा। वैसे तो लोग साथ जीने-मरने की कसमें अक्सर खाते हैं, लेकिन इसे हर कोई पूरा नहीं कर पाता है। पर साहित्यकार भोलानाथ आलोक ने अपनी पत्नी पद्मा रानी को साथ जीने-मरने का दिया वचन निभाने के लिए एक बहुत ही अनोखा काम किया है।
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भोलानाथ आलोक ने 27 साल से अपनी पत्नी की अस्थियां संजोकर रखी हैं। साथ ही अपने बच्चों को कहा है कि उनकी मौत के बाद उनकी चिता के साथ ही इन अस्थियों को भी अग्नि के हवाले कर दिया जाए। उन्होनें अस्थियों की पोटली एक पेड़ पर लटका कर रखी है, जिसे वो एकांत में निहारते रहते हैं। उनका कहना है कि पद्मा की ये याद उनके साथ ही दुनिया से विदा होगी।
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बता दें कि 87 साल के भोलानाथ आलोक की शादी बचपन में ही हो गई थी। तब दोनों ने साथ-जीने मरने की कसम खाई थी। पर उनकी पत्नी पद्मा की असमय ही मौत हो गई, लेकिन भोलानाथ आलोक ने अपने वादे को पूरा करने के लिए पत्नि की अस्थियां अपने साथ रख लीं।
Published : 3 September 2019, 12:40 PM IST
Topics : bihar purnia अस्थियां पूर्णिया बिहार भोलानाथ आलोक साहित्यकार