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नई दिल्ली: भस्म से सजी देह और आकाश की ओर बढ़ती जटाएं और आंखों में एक अनोखी चमक वो कोई और नहीं वो हैं नागा साधू। आखिर कौन होते हैं नागा साधू जो हर बार महाकुंभ में आर्कषण का केंद्र बनते हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक, दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन हर 12 साल में एक बार किया जाता है और वो है महाकुंभ। इस साल यह प्रयागराज में संगम तट के किनारे 13 जनवरी 2025 से शुरू हो रहा है। महाकुंभ में देश-विदेश से लोग आते हैं, जो भारतीय संस्कृति को जानने की कोशिश करते हैं। यहां भक्त जन पवित्र नदी में स्नान करके पुण्य कमाने के लिए आते हैं। यहां साधू संत भी गंगा नदी में डुबकी लगाने के लिए आया करते हैं। महाकुंभ में हर बार जो मुख्य आकर्षण बनते हैं वो होते हैं नागा साधू। वेषभूषा और अपने रहन-सहन की वजह से नागा साधूओं के बारे में जानने की इच्छा लोगों के मन में बनी रहती है। ऐसे में चलिए आज जानते हैं कि कौन होते हैं नागा साधू और कैसा होता है इनका रहन-सहन।
कैसा होता है नागा साधू का जीवन
नागा साधु सनातन धर्म के साधक होते हैं जो सदा के लिए निर्वस्त्र रहते हैं। इनका बिना कपड़ों के रहना इस बात का प्रतीक होता है कि उन्होंने सांसारिक मोह माया त्यागा हुआ है। उनका जीवन तप, साधना, और मोक्ष की प्राप्ति के लिए समर्पित होता है। ऐसे में वे पूरे दिन ध्यान और साधना में लीन रहते हैं, जिसमें विशेष रूप से स्नान और पद्मासन (ध्यान की मुद्रा) शामिल हैं। नागा साधु भौतिक चीजों से दूर रहकर साधारण जीवन यापन हैं। यह अपने जीवन में सिर्फ प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करते हैं। नागा साधु अपनी साधना में इतने मग्न रहने हैं कि वे समाजिक दूरी बनाए रखते हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति होता है।
आसान नहीं है नागा साधू बनना
नागा साधूओं का जीवन जितना कठिन होता है, उतना ही मुश्किल किसी इंसान के लिए नागा साधू बनना होता है। व्यक्ति को नागा साधु अखाड़ों के द्वारा बनाया जाता है। अखाड़ा समिति देखती है कि व्यक्ति साधु बनने के योग्य है भी या नहीं? इसके बाद ही उस व्यक्ति को अखाड़े में प्रवेश दिया जाता है। इसके बाद नागा साधु बनने के लिए परीक्षाएं देनी पड़ती है। नागा साधू बनन के लिए ब्रह्मचर्य के नियम का पालन करना जरूरी होता है। इस परीक्षा में सफल होने के लिए 5 गुरु से दीक्षा प्राप्त करनी होती है। शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य और गणेश द्वारा, जिन्हें पंच देव भी कहा जाता है। इसके बाद ही व्यक्ति सांसारिक जीवन त्यागकर अध्यात्मिक जीवन में आता है और खुद का पिंडदान करता है। इतना ही नहीं नागा साधू खाना भी वही खाते हैं जो उन्हें भिक्षा में मिलता है। अगर किसी दिन उन्हें भिक्षा न मिले तो उन्हें बिना भोजन के ही रहना होता है। नागा साधु समाज के लोगों के सामने कभी सिर नहीं झुकाते हैं लेकिन वह वरिष्ठ सन्यासियों से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सिर झुकाते हैं। साथ ही वे जीवन में कभी भी किसी की निंदा नहीं करते हैं। जो व्यक्ति इन सभी नियमों का पालन करता है। वह बनता है नागा साधु।
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Published : 11 January 2025, 4:37 PM IST
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