मणिपुर मुख्यमंत्री का दावा, वर्तमान स्थिति से बचा जा सकता था

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मंगलवार को कहा कि अगर मादक पदार्थों और अवैध प्रवासियों की कोई समस्या नहीं होती तो राज्य में मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था। पढ़ें पूरी रिपोर्ट डाइनामाइट न्यूज़ पर

Updated : 9 January 2024, 7:38 PM IST
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इंफाल: मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मंगलवार को कहा कि अगर मादक पदार्थों और अवैध प्रवासियों की कोई समस्या नहीं होती तो राज्य में मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार सिंह ने कहा कि अगर सरकार मादक पदार्थों के उपयोग के खिलाफ कदम उठाती है और राज्य में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अनधिकृत अप्रवासियों की आमद के खिलाफ उसके अभियान असंवैधानिक पाए जाते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे।

मणिपुरी शासक महाराजा गंभीर सिंह की 190वीं पुण्य तिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की 30 लाख आबादी में से 1.5 लाख युवा नशे की लत के शिकार हैं।

उन्होंने कहा, “वर्तमान और भावी पीढ़ियों को बचाने के लिए (राज्य सरकार द्वारा) मादक पदार्थों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की गई थी। यदि मादक द्रव्य नहीं होते, पोस्ता की खेती नहीं होती और अवैध आप्रवासन नहीं होता तो वर्तमान स्थिति नहीं होती।”

सिंह ने कहा, “मणिपुर सरकार की वास्तव में क्या गलती और असंवैधानिक कृत्य था जिसके कारण आम लोगों पर हमले हुए और उनके घर जलाए गए? यदि मादक द्रव्यों के खिलाफ सरकारी अधिनियम और अवैध आप्रवासियों की आमद के खिलाफ अभियान में कुछ भी असंवैधानिक था तो मैं तुरंत इस्तीफा दे दूंगा। मुझे संविधान की रक्षा और कार्यान्वयन करना है, जो मेरी जिम्मेदारी है।”

उन्होंने दावा किया कि पहले किसी ने भी राज्य के लोगों के साथ वर्तमान स्थिति पर चर्चा नहीं की थी और मादक पदार्थों के प्रभाव, पर्यावरण और पारिस्थितिक असंतुलन (अफीम की खेती के लिए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई के कारण), जनसंख्या और जनसांख्यिकीय असंतुलन के मुद्दों पर लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा, “हालांकि, आज यह बिल्कुल स्पष्ट है कि राज्य कितनी परेशानी में है।”

उन्होंने राज्य के सामाजिक मुद्दों और इतिहास पर चर्चा के लिए संवाद और संगोष्ठियां आयोजित करने की सलाह दी।

राज्य पिछले साल तीन मई से जातीय हिंसा से ग्रस्त है, जब बहुसंख्यक मेइती समुदाय की एसटी दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘जनजातीय एकजुटता मार्च’ आयोजित किया गया था। हिंसा में 180 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और कई सौ लोग घायल हुए हैं।

Published : 
  • 9 January 2024, 7:38 PM IST

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