महराजगंज नगर बचाओ संघर्ष समिति की प्रेस वार्ता, नंबर पर काबिज लोगों को जबरन उजाड़ना गलत

डीएन संवाददाता

नियम-कानून को दरकिनार कर गलत तरीके से नेशनल हाइवे के निर्माण के खिलाफ महराजगंज नगर बचाओ संघर्ष समिति से जुड़े लोगों ने प्रेस वार्ता की और अपनी आपत्तियों के बारे में विस्तार से बताया। डाइनामाइट न्यूज़ विशेष:


महराजगंज: यदि कोई व्यक्ति सौ साल से अपने नंबर पर काबिज है तो यह सड़क कैसी हो सकती है? कैसे यह अतिक्रमण हो सकता है? यह सवाल उठाया नगर बचाओ संघर्ष समिति के लोगों ने।

यह भी पढ़ें: महराजगंज में बुलडोजर से घर गिराने की चेतावनी से लोगों में दहशत, जिला प्रशासन मौन

स्थानीय दुर्गा मंदिर पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री सुशील कुमार टिबड़ेवाल, व्यापारी नेता शैल कुमार जायसवाल, आनंद शरण श्रीवास्तव, विक्की जालान, उद्योग व्यापार मंडल के नेता सुधाकर पटेल, मनोज गुप्ता आदि ने एक स्वर से कहा कि इस अंधेरगर्दी और मनमानेपन का पुरजोर विरोध किया जायेगा।

यह भी पढ़ें: हाइवे निर्माण के नाम पर देखिये किस तरह लोगों को उजाड़ा जा रहा है

कैसे बिना किसी लिखित नोटिस के, बिना अधिग्रहण के, बिना मुआवजे के, किसी की व्यक्तिगत जमीन को जबरदस्ती अतिक्रमण बताकर जबरन तोड़ा जा सकता है?

इन लोगों ने कहा कि जिलाधिकारी से लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को समय-समय पर अवगत कराया गया लेकिन किसी ने आम जनता की तकलीफ को दूर करने का काम नहीं किया।

ठेकेदार ने किस अधिकार से जबरन मुनादी कराकर आम जनता को धमकी देने व भयाक्रांत करने की कोशिश की कि 5 सितंबर तक नगर के दोनों तरफ 16-16 मीटर लोग खुद तोड़ लें अन्यथा 6 सितंबर से जबरन तोड़ डाला जायेगा।

ठेकेदार ने आज तक निर्माण के बाबत कोई सूचनात्मक बोर्ड नहीं लगाया है, जो किसी भी निर्माण के नियमों व शर्तों का खुला उल्लघंन है लेकिन जिले के अफसर इस पर रहस्यमयी चुप्पी धारण किये हुए हैं। इस निर्माण के बारे में कोई गजट पास नहीं हुआ है। लाउडस्पीकर से मुनादी करवाकर नगर में सिर्फ दहशत फैलायी जा रही है।  

गणेशोत्सव से लेकर, मुहर्रम, दशहरा, दीपावली सारे त्यौहारों के समय में इस तरह की अराजकता फैलाकर आम नागरिकों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

निर्माण के दौरान उजाड़ी गयी सड़कों पर कहीं भी पानी का छिड़काव नहीं किया गया। धूल उड़कर लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रही है। इन सब नियम व शर्तों से जिले के अफसर अंजान बने हुए हैं।

(डाइनामाइट न्यूज़ के ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)










आपकी राय

Loading Poll …