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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने भोजन के ‘बिल’ पर होटल और रेस्तरां को स्वत: सेवा शुल्क लगाने से निषिद्ध करने संबंधी दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई बुधवार को 12 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दी।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक ये दिशानिर्देश केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने पिछले साल चार जुलाई को जारी किये थे, जिस पर उस महीने के अंत में उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।
केंद्र ने अपनी अर्जी के जरिये अदालत से विषय पर विचार करने का अनुरोध करते हुए दावा किया कि दिशानिर्देश उपभोक्ताओं के हित में जारी किये गये थे। केंद्र ने स्थगन आदेश पर रोक हटाने की अर्जी भी दी है।
इसने यह भी दावा किया है कि कुछ रेस्तरां इस सिलसिले में अब अंतरिम आदेश का सहारा ले रहे हैं कि वे सेवा शुल्क लगाने के हकदार हैं।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने बुधवार को कहा कि अंतरिम आदेश में बदलाव पक्षकारों को सुने बगैर नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी कहा , ‘‘यदि मुख्य विषय की सुनवाई अगली तारीख पर नहीं की जाती है, तो स्थगन पर रोक हटाने की अर्जी पर विचार किया जाएगा।’’
याचिकाकर्ता (रेस्तरां संगठनों) की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि सेवा शुल्क एक पारंपरिक शुल्क है और यह उनके बीच वितरित किया जाता है जो ग्राहकों के समक्ष नहीं जाते हैं तथा रेस्तरां व्यंजन कार्ड एवं अपने परिसर में इस बारे में सूचना प्रदर्शित कर इसे मांगते हैं।
याचिकाकर्ता--नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया और फेडरेशन ऑफ होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस-- ने दलील दी कि सीसीपीए का आदेश मनमाना और रद्द किये जाने योग्य है।
Published : 15 February 2023, 6:42 PM IST
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