बिहार में जाति जनगणना पर रोक बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर कही ये बड़ी बातें

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर स्थगनादेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें बिहार सरकार द्वारा कराए जा रहे जाति आधारित सर्वेक्षण पर रोक लगा दी गई थी। पढ़िये पूरी खबर डाइनामाइट न्यूज़ पर

Updated : 18 May 2023, 4:41 PM IST
google-preferred

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर स्थगनादेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें बिहार सरकार द्वारा कराए जा रहे जाति आधारित सर्वेक्षण पर रोक लगा दी गई थी।

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि इस बात की जांच करनी होगी कि क्या यह कवायद सर्वेक्षण की आड़ में जनगणना तो नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम यह स्पष्ट कर रहे हैं, यह ऐसा मामला नहीं है जहां हम आपको अंतरिम राहत दे सकते हैं।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय ने मुख्य याचिका की सुनवाई तीन जुलाई के लिए स्थगित कर दी है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम निर्देश देते हैं कि इस याचिका को 14 जुलाई को सूचीबद्ध किया जाये। यदि किसी भी कारण से, रिट याचिका की सुनवाई अगली तारीख से पहले शुरू नहीं होती है, तो हम याचिकाकर्ता (बिहार) के वरिष्ठ वकील की दलीलें सुनेंगे।’’

पटना उच्च न्यायालय के चार मई के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में दायर याचिका में बिहार सरकार ने कहा है कि जातीय सर्वेक्षण पर रोक से पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि जाति आधारित आंकड़ों का संग्रह अनुच्छेद 15 और 16 के तहत एक संवैधानिक मामला है।

बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण का पहला दौर सात से 21 जनवरी के बीच आयोजित किया गया था। दूसरा दौर 15 अप्रैल को शुरू हुआ था और 15 मई तक चलने वाला था।

Published : 
  • 18 May 2023, 4:41 PM IST

Advertisement
Advertisement