Sonbhadra: गंदे नाले का पानी पीने को मजबूर गरीब आदिवासी, जानिए पूरी खबर
सोनभद्र में रहने वाले आदिवासी पहाड़ी नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

सोनभद्र: सरकार स्वच्छ पेयजल को लेकर कितना सजग है इसका अंदाजा वीडियो देखकर लगाया जा सकता। विकास के नाम ढिंदौरा पीटने वाली सरकार के हुकमुरान आखिर क्यों गरीब आदिवासियों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित करके रखा है ये सोचनीय विषय है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार ओबरा तहसील के ब्लॉक चोपन के पियरी माटी टोला ग्राम कनच्छ में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग पहाड़ी नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। ताजुब की बात यह भी है की उस पानी को मवेशी भी अपनी प्यास बूझाने के लिए नाले का पानी पीते है।
गरीब महिला ने बताया वो कई कोस दूर से नाले का पानी लेने आती है और साड़ी को बाल्टी पर रखकर पानी में घुले कचरे को अलग करती है। गंदे पानी पीने से होने की बीमारी पर महिला ने दो तुक कहा ज़ब बीमारी होगी तो देखी जाएगी। आदिवासी महिला का बस यही कहना है सरकारी अधिकारी उनकी सुनते नहीं अगर मोदी तक बात पहुंची तो उनका उधार हो जाएगा
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क्या बोले ग्रामीण
इस बारे में ग्रामीण फूलवंति ने डाइनामाइट न्यूज़ से बताया कि वह कई वर्षों से इस पहाड़ी क्षेत्र में रह रही है। परिवार में सात आठ सदस्य हैं उनके पानी पीने का इंतज़ाम करना उनकी ही जिम्मेदारी है। महिला ने कहा क्षेत्र में पानी की व्यवस्था नहीं है इस वजह से वो गंदा पानी पीने को मज़बूर है।
महिला ने कहा कि मवेशी भी कहां जाये, उनको भी तो प्यास लगती है। हम इंसान है हम तो कहीं से भी पीने के लिए पानी का जुगाड़ कर लेंगे मवेशी को यही पानी दिखता है इसलिए वो इसी नाले का पानी पीते है।
महिला का कहना है कि बिना पानी उबाले ही वो और परिवार के अन्य सदस्य पानी पीकर अपनी प्यास बुझाती है।
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गंदे पानी पीने से होने वाली बीमारी पर महिला ने सीधा जवाब दिया। उन्होने कहा ज़ब बीमारी होगी देखी जाएगी। अधिकारी कभी उनके इलाके में नहीं आते और अधिकारी से समस्या बताने का कोई फायदा नहीं। आगे के सवाल पर महिला कहती है हम क्या जाने हम तो ठहरे पागल इंसान।