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महावीर जयंती सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश भी है। इस दिन से जुड़ी कई ऐसी खास बातें हैं जो हर किसी को जाननी चाहिए। क्या आप जानते हैं इसके पीछे छिपे गहरे अर्थ और परंपराएं? जानिए इस खास मौके से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे।
महावीर जयंती (Img: Internet)
New Delhi: महावीर जयंती जैन धर्म का एक प्रमुख और पवित्र पर्व है, जिसे भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान महावीर, जिन्हें वर्धमान के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। ये दिन उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य और सादगी के संदेशों को याद करने और जीवन में अपनाने का अवसर होता है।
साल 2026 में महावीर जयंती 31 मार्च, मंगलवार को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च सुबह 7:09 बजे से शुरू होकर 31 मार्च सुबह 6:55 बजे तक रही। इसी तिथि के अनुसार यह पर्व हर साल मनाया जाता है।
भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी जीवन को सरल और शांत बनाने का मार्ग दिखाती हैं। उनके प्रमुख सिद्धांत हैं:
अहिंसा (किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाना)
सत्य (सच्चाई का पालन करना)
अस्तेय (चोरी न करना)
ब्रह्मचर्य (इंद्रियों पर नियंत्रण)
अपरिग्रह (अधिक संग्रह न करना)
उन्होंने सिखाया कि सादा जीवन और उच्च विचार ही सच्ची शांति का रास्ता है।
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1. भक्त महावीर जयंती कैसे मनाते हैं?
भक्त इस दिन जैन मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं, भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक करते हैं, शोभायात्रा निकालते हैं और दान-पुण्य करते हैं। कई जगह भंडारे और सेवा कार्य भी आयोजित होते हैं।
2. महावीर जयंती के कार्यक्रमों या जुलूसों में मैं कहां शामिल हो सकता/सकती हूं?
आप अपने शहर के जैन मंदिरों, धार्मिक संगठनों या स्थानीय समितियों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। बड़े शहरों में भव्य शोभायात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं।