अधिकमास 2026 आज शुरू, जानें पूरे महीने के खास व्रत-त्योहार और पूजा करने का शुभ समय

अधिकमास 2026 की शुरुआत 17 मई से हो रही है। पुरुषोत्तम मास में पूजा-पाठ, दान, जप-तप और तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान पद्मिनी एकादशी, गुरु प्रदोष, पूर्णिमा और शिवरात्रि समेत कई बड़े व्रत-त्योहार पड़ेंगे।

Updated : 17 May 2026, 1:53 PM IST
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New Delhi: ज्येष्ठ माह में इस बार अधिकमास का विशेष संयोग बन रहा है। अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, 17 मई 2026 रविवार से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने के स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। स्कंद पुराण में अधिकमास को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।

इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन पूजा-पाठ, जप-तप, दान, कथा, गीता पाठ और तीर्थ यात्रा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में किए गए धार्मिक कार्यों का फल करोड़ों गुना तक बढ़ जाता है।

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अधिकमास 2026 व्रत-त्योहार कैलेंडर

17 मई 2026, रविवार – अधिकमास प्रारंभ
19 मई 2026, मंगलवार – बड़ा मंगल
20 मई 2026, बुधवार – वरदा चतुर्थी
21 मई 2026, गुरुवार – अधिक स्कन्द षष्ठी, गुरु पुष्य नक्षत्र
23 मई 2026, शनिवार – अधिक मासिक दुर्गाष्टमी
25 मई 2026, सोमवार – गंगा दशहरा
26 मई 2026, मंगलवार – बड़ा मंगल
27 मई 2026, बुधवार – अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी और पद्मिनी एकादशी
28 मई 2026, गुरुवार – गुरु प्रदोष व्रत
31 मई 2026, शनिवार – अधिकमास पूर्णिमा व्रत
3 जून 2026, बुधवार – विभुवन संकष्टी चतुर्थी
6 जून 2026, शनिवार – मृत्यु पंचक
8 जून 2026, सोमवार – अधिक कालाष्टमी
11 जून 2026, गुरुवार – परम एकादशी
12 जून 2026, शुक्रवार – शुक्र प्रदोष व्रत
13 जून 2026, शनिवार – अधिक मासिक शिवरात्रि
15 जून 2026 – ज्येष्ठ अधिकमास अमावस्या, मिथुन संक्रांति और अधिकमास समाप्त

अधिकमास में क्यों बढ़ जाता है पूजा-पाठ का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है। यही कारण है कि इस महीने में स्नान, दान, व्रत, जप-तप और धार्मिक अनुष्ठानों का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।

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जो लोग पूरे महीने नियमित पूजा नहीं कर पाते, वे पद्मिनी एकादशी, परम एकादशी, गुरु प्रदोष व्रत, पूर्णिमा और अमावस्या के दिन श्रीहरि विष्णु की विशेष पूजा कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से समस्त तीर्थों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

अधिकमास में तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व

अधिकमास को आत्मचिंतन, भक्ति और साधना का समय माना जाता है। इस दौरान सांसारिक कार्यों से दूरी बनाकर व्यक्ति ईश्वर भक्ति में मन लगाता है। पद्म पुराण के अनुसार इस महीने में बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, द्वारका, वृंदावन, हरिद्वार और प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थों की यात्रा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

धार्मिक दृष्टि से पुरुषोत्तम मास को पुण्य अर्जित करने का सर्वोत्तम समय माना गया है।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि डाइनामाइट न्यूज़ किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

Location :  New Delhi

Published :  17 May 2026, 1:53 PM IST

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