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हल्दी लगाने के बाद घर में रहने की परंपरा क्यों? (Img- Internet)
New Delhi: हिंदू विवाह परंपराओं में हल्दी की रस्म का विशेष महत्व होता है। शादी से पहले निभाई जाने वाली यह रस्म केवल एक परंपरा नहीं बल्कि धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि हल्दी लगाने के बाद दूल्हा और दुल्हन को घर से बाहर क्यों नहीं जाने दिया जाता।
हिंदू संस्कृति में हल्दी को पवित्र और शुभ माना गया है। यह न केवल सौंदर्य बढ़ाने के लिए प्रयोग होती है, बल्कि इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हल्दी शरीर और मन दोनों को शुद्ध करती है और विवाह जैसे पवित्र कार्य के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करती है।
मान्यता है कि हल्दी लगाने के बाद शरीर में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो शुभता और सौभाग्य का प्रतीक होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हल्दी का संबंध राहु और केतु जैसे ग्रहों के प्रभाव से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में हल्दी के बाद घर से बाहर निकलने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका मानी जाती है, इसलिए दूल्हा-दुल्हन को घर में ही रहने की सलाह दी जाती है।
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वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, जो त्वचा पर गहराई तक असर डालती है। हल्दी लगाने के बाद त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है। ऐसे में धूप या धूल के संपर्क में आने से त्वचा में जलन, एलर्जी या कालापन आ सकता है। इसलिए भी परंपरागत रूप से दूल्हा-दुल्हन को घर के अंदर रखा जाता है ताकि उनकी त्वचा सुरक्षित रहे।
हल्दी लगाने के बाद त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते हैं, जिससे धूल और गंदगी आसानी से चिपक सकती है। यही कारण है कि इस समय बाहर जाने से बचने की सलाह दी जाती है ताकि चेहरे की चमक और सौंदर्य बना रहे। पुराने समय से यह परंपरा इस उद्देश्य से भी निभाई जाती रही है।
हल्दी की रस्म केवल धार्मिक या वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस दौरान पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा होकर गीत-संगीत और शुभ कार्यों में शामिल होता है। दूल्हा-दुल्हन को घर के भीतर रखकर परिवार के सदस्य उनके साथ समय बिताते हैं, जिससे पारिवारिक बंधन और मजबूत होता है।
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आज के समय में भी हल्दी की रस्म को उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जाता है। यह परंपरा न केवल भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि प्राचीन रीति-रिवाजों के पीछे अक्सर वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी छिपे होते हैं।
Location : New Delhi
Published : 31 May 2026, 12:31 PM IST