‘जो जाना चाहता है, उसे जाने दो’: 5 सांसदों के टूटने की चर्चा के बीच उद्धव ठाकरे का संदेश

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के भीतर टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी के पांच सांसदों के अलग गुट बनाने की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने साफ कहा है कि जो नेता जाना चाहता है, उसे वह रोकेंगे नहीं। इस घटनाक्रम ने शिवसेना के पुराने राजनीतिक इतिहास और पिछली बगावतों की याद भी ताजा कर दी है।

Updated : 17 June 2026, 4:38 PM IST
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New Delhi: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (UBT) चर्चा के केंद्र में है। पार्टी के पांच सांसदों के बागी तेवर अपनाने और अलग समूह बनाने की अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सांसदों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे जबरन रोकने का कोई मतलब नहीं है।

सांसदों की बैठक में उद्धव ठाकरे का संदेश

रविवार को हुई बैठक में उद्धव ठाकरे ने सांसदों और नेताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय भले ही उनके पक्ष में न हो, लेकिन भविष्य में परिस्थितियां बदलेंगी। उन्होंने नेताओं से धैर्य बनाए रखने और संघर्ष जारी रखने की अपील की। ठाकरे ने कहा कि जो व्यक्ति खुद ही पार्टी छोड़ना चाहता है, उसे रोकने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को केवल शुभकामनाएं दी जा सकती हैं और उम्मीद की जा सकती है कि वे जहां भी जाएं, सफल रहें।

2022 की बगावत का किया जिक्र

बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बगावत को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों की जानकारी थी, लेकिन वे किसी भी नेता पर दबाव बनाकर उसे रोकने के पक्ष में नहीं थे। गौरतलब है कि 2022 की बगावत शिवसेना के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक थी। इस बगावत के बाद महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी और शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी।

क्या स्वतंत्र समूह बना सकते हैं सांसद ?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नाराज सांसद किसी अन्य दल में शामिल होने के बजाय संसद में एक अलग स्वतंत्र समूह बना सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीति कुछ हद तक तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसदों द्वारा अपनाए गए मॉडल जैसी हो सकती है। ऐसी भी अटकलें हैं कि यदि अलग समूह बनता है तो वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बाहर से समर्थन दे सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शिवसेना के इतिहास में बगावतों का सिलसिला

शिवसेना का इतिहास कई बड़े राजनीतिक विभाजनों का गवाह रहा है। यदि पांच सांसदों के अलग होने की चर्चाएं सच साबित होती हैं, तो यह पार्टी के इतिहास में पांचवां बड़ा विभाजन माना जाएगा।

1991: छगन भुजबल की बगावत

शिवसेना में पहली बड़ी बगावत तब हुई जब वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने पार्टी छोड़ दी और बाद में कांग्रेस से जुड़ गए।

2005: नारायण राणे का इस्तीफा

पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने शिवसेना नेतृत्व से मतभेद के बाद पार्टी छोड़ दी, जिससे संगठन को बड़ा झटका लगा।

2006: राज ठाकरे का अलग रास्ता

बालासाहेब ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया। यह पार्टी के लिए सबसे चर्चित विभाजनों में से एक था।

2022: एकनाथ शिंदे की बगावत

एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने विद्रोह किया। इसके परिणामस्वरूप उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई और शिवसेना दो धड़ों में बंट गई।

आदित्य ठाकरे ने जताया भरोसा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने पार्टी सांसदों पर पूरा विश्वास जताया है। पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने सांसदों की निष्ठा पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अंधभक्ति की बात करते हैं, लेकिन शिवसेना को अपने सांसदों पर पूरा विश्वास है। आदित्य ठाकरे ने पांच सांसदों के टूटने संबंधी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सभी सांसद पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।

शिंदे विद्रोह ने बदला था सत्ता का गणित

2022 में शिवसेना के वरिष्ठ नेता  एकनाथ शिंदे ने पार्टी के कई विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बागी विधायक पहले सूरत और बाद में गुवाहाटी पहुंच गए। शिंदे गुट का आरोप था कि शिवसेना ने भाजपा से अलग होकर कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाकर बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से समझौता किया है।

बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच उद्धव ठाकरे सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करने की स्थिति में नहीं रही। इसके बाद 29 जून 2022 को उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अगले ही दिन भाजपा के समर्थन से एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने, जबकि भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री पद संभाला। बगावत के बाद मामला चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। चुनाव आयोग ने बाद में शिंदे गुट को ही असली शिवसेना माना और पार्टी का चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ भी उन्हें दे दिया। इसके बाद उद्धव ठाकरे गुट को शिवसेना (UBT) के नाम से नई पहचान मिली। इस बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी और शिवसेना के इतिहास में सबसे बड़ा विभाजन दर्ज हो गया।

आगे क्या?

महाराष्ट्र की राजनीति में इन चर्चाओं ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने खुलकर बगावत की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ये चर्चाएं केवल अफवाह साबित होती हैं या फिर शिवसेना को एक और बड़े राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ेगा।

Location :  New Delhi

Published :  17 June 2026, 4:23 PM IST

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