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बिहार चुनाव 2025 की तैयारी में महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को सीएम उम्मीदवार के रूप में घोषित करने का निर्णय लिया है। सीट बंटवारे को लेकर गुरुवार को हुई बैठक में कांग्रेस, आरजेडी और CPI के बीच कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
तेजस्वी यादव
Patna: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए महागठबंधन ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में तेजस्वी यादव के नाम पर सहमति जताई है। सूत्रों के अनुसार, महागठबंधन में शामिल सभी प्रमुख दलों ने तेजस्वी यादव को सीएम चेहरे के रूप में स्वीकार कर लिया है। आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि महागठबंधन को एकजुट होकर तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से सीएम कैंडिडेट घोषित करना चाहिए।
महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर गुरुवार (09 अक्टूबर) को बैठकों का दौर जारी रहा। आरजेडी के सूत्रों के अनुसार, इस बार आरजेडी लगभग 135-140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस को 50-52 सीटें देने की बात की जा रही है, जो कि कांग्रेस की मांग 70 सीटों से कम है। 2020 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह सिर्फ 19 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। इस बार पार्टी को उम्मीद है कि सीटों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन कम सीटों के साथ ही समझौता करना पड़ेगा।
तेजस्वी यादव
महागठबंधन के अन्य घटक दल जैसे कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ India (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन (CPI(ML)) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने भी सीट बंटवारे को लेकर अपनी मांगें रखी हैं। CPI(ML) ने इस बार 40 सीटों की मांग की है, जबकि पहले उसे 20-25 सीटें मिल रही थीं। 5 साल पहले CPI(ML) ने 19 सीटों में से 12 पर जीत हासिल की थी। मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी भी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने पर अड़ी हुई है। इसके अलावा, सहनी ने डिप्टी सीएम पद की भी मांग की है, जो पार्टी के लिए एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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महागठबंधन में सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जल्द ही सभी मुद्दों पर सहमति बन जाएगी। गठबंधन के दलों के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि सीटों का बंटवारा जल्द ही अंतिम रूप से तय किया जाएगा। अब्दुल बारी सिद्दीकी ने यह भी कहा कि सीट शेयरिंग और उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम निर्णय अगले एक-दो दिनों में लिया जाएगा। यह प्रक्रिया महागठबंधन के अंदर की एकजुटता और भविष्य के चुनावों के लिए एक मजबूत रणनीति का संकेत देती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि महागठबंधन का तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश करना उनकी राजनीतिक यात्रा का अहम मोड़ है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ यह महागठबंधन एक मजबूत चुनौती बन सकता है। तेजस्वी यादव को युवा और विकासवादी नेता के रूप में देखा जा रहा है और उनकी उपस्थिति से महागठबंधन को चुनावी लाभ हो सकता है। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना बिहार के विकास में कोई नई दिशा नहीं ला पाएगा, लेकिन यह चुनावी बयानों का अहम हिस्सा रहेगा।
बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी के साथ महागठबंधन अपने मुद्दों और उम्मीदवारों को लेकर रणनीतिक बदलाव करने में जुटा हुआ है। सीटों का बंटवारा और नेतृत्व का निर्णय आगामी चुनाव में गठबंधन की सफलता या विफलता को निर्धारित करेगा। यदि सभी दलों में तालमेल बैठ जाता है, तो महागठबंधन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक प्रभावी विकल्प बन सकता है। इसके लिए तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों को अपनी सीटों और उम्मीदवारों को लेकर और भी अधिक स्पष्टता की आवश्यकता होगी।
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