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पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बड़ा बयान! लोकसभा में बोले- हॉर्मुज स्ट्रेट में रुकावट बर्दाश्त नहीं। जानें कैसे 53 लाख मीट्रिक टन तेल रिजर्व और 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत सुरक्षित है और अब तक कितने भारतीयों की हुई घर वापसी।
पीएम मोदी लोकसभा संबोधन(source: google)
New Delhi: पश्चिम एशिया में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार, 23 मार्च 2026 को लोकसभा में भारत का पक्ष मजबूती से रखा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत इन हमलों का कड़ा विरोध करता है और किसी भी स्थिति में हॉर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग में रुकावट को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने वैश्विक शांति की अपील करते हुए जोर दिया कि नागरिकों और पावर प्लांट जैसे बुनियादी ढांचों पर हमले किसी भी सूरत में मंजूर नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने सदन को विश्वास दिलाया कि सरकार इस चुनौतीपूर्ण समय में पूरी तरह सतर्क और संवेदनशील है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में हॉर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत पर विशेष चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत की जरूरत का कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग से जहाजों का आवागमन काफी जोखिम भरा हो गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ा है। इसके बावजूद, केंद्र सरकार का प्राथमिक फोकस इस बात पर रहा है कि देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति कम न हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले दशक में ऊर्जा सुरक्षा के लिए दूरगामी कदम उठाए हैं, जिसका लाभ अब दिखाई दे रहा है।
भारत की भविष्य की तैयारियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि देश ने कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। वर्तमान में भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है और सरकार 65 लाख मीट्रिक टन के अतिरिक्त भंडारण की व्यवस्था पर तेजी से काम कर रही है। पिछले 11 वर्षों में भारत की रिफाइनरी क्षमता में भी बड़ा सुधार हुआ है, जिससे कच्चे तेल की चुनौतियों से निपटने में मदद मिल रही है। इसके अतिरिक्त, तेल की निर्भरता कम करने के लिए भारत अब 27 के बजाय 41 देशों से ईंधन का आयात कर रहा है।
ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रधानमंत्री ने इथेनॉल ब्लेंडिंग को एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने सदन को सूचित किया कि एक दशक पहले देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग की क्षमता मात्र एक से डेढ़ प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत के करीब पहुंच रही है। इस सुधार के कारण भारत को प्रति वर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है, जिससे देश के खजाने पर पड़ने वाले बोझ में बड़ी कमी आई है। संकट के इस समय में इथेनॉल उत्पादन की यह स्वदेशी क्षमता भारत के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है।
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प्रधानमंत्री ने भारतीयों की सुरक्षा को अपनी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। उन्होंने जानकारी दी कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक विशेष प्रयासों के जरिए 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। विदेशों में भारतीय मिशन लगातार एडवाइजरी जारी कर रहे हैं और 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने स्वयं पश्चिम एशिया के राष्ट्राध्यक्षों से दो चरणों में फोन पर बातचीत की है, जिन्होंने हर भारतीय की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। हालांकि, कुछ भारतीयों की मृत्यु पर उन्होंने गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का वादा भी किया।
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युद्ध का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव खेती और बिजली पर भी पड़ने की आशंका है। इस पर पीएम मोदी ने देश को आश्वस्त किया कि भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार है और आगामी खरीफ सीजन के लिए खाद की अग्रिम व्यवस्था कर ली गई है। गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली की मांग को लेकर भी सरकार पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि देश के पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक है और भारत ने लगातार दूसरे साल 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। अंत में, उन्होंने संसद से एक सुर में शांति की आवाज बुलंद करने की अपील की ताकि दुनिया को भारत की एकजुटता का संदेश जा सके।